Saturday, 15 May, 2021

अब पतले लोग भी डायबिटीज-2 की चपेट में

रिसर्च जर्नल ‘डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम’ की एक स्टडी में हुआ खुलासा

डॉ.पी.के.मुखर्जी
न्यूजवेव@नईदिल्ली

देश में हुए एक मेडिकल रिसर्च में यह बात सामने आई कि सामान्य वजन वाले दुबले-पतले लोग भी टाइप-2 मधुमेह का शिकार हो सकते हैं। इस नए रिसर्च से यह मिथक टूट गया कि सिर्फ मोटापा बढ़ने से ही डायबिटीज होती है।


विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज इंसुलिन के प्रतिरोध से होता है। ग्लूकोज को रक्तप्रवाह से हटाकर कोशिकाओं में स्थापित करने के लिए इंसुलिन हार्मोन संकेत भेजता है। शरीर में मौजूद मांसपेशियां, फैट एवं यकृत जब इन संकेतों के खिलाफ रिएक्शन देते हैं तो इंसुलिन प्रतिरोध की स्थिति पैदा होती है। इंसुलिन प्रतिरोध से ही मधुमेह होता है, जिसे मेडिकल साइंस में टाइप-2 डायबिटीज मेलेटस (डीएम) या फिर टी-2 डीएम कहते हैं।
इस मेडिकल स्टडी में 87 डायबिटीज रोगियों ( जिनमें 67 पुरुष और 20 महिलाएं शामिल हैं) के इंसुलिन सहित सी-पेप्टाइड के स्तर को मापा गया। अग्नाशय में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाएं सी-पेप्टाइड छोड़ती हैं। सी-पेप्टाइड 31 एमिनो एसिड युक्त एक पॉलीपेप्टाइड होता है। सी-पेप्टाइड शरीर में ब्लड शुगर को प्रभावित नहीं करता। लेकिन डॉक्टर यह जानने के लिए इसके लेवल को जांचते हैं कि शरीर कितने इंसुलिन का निर्माण कर रहा है।
स्टडी में पता चला कि सी-पेप्टाइड का स्तर इंसुलिन के स्तर की तुलना में अधिक स्थिर होता है, जो बीटा कोशिकाओं के रिएक्शन की जांच करने में मदद करता है। मरीजों के शरीर में वसा के जमाव, पेट की चर्बी और फैटी लीवर जैसे लक्षण दिखाई दियें, जो आमतौर पर बाहर से दिखाई नहीं देते हैं।
शोध में यह सामने आया


शोध में सामान्य वजन ( 25से कम बीएमआई ) और दुबले (19 से कम बीएमआई ) व्यक्तियों के शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल, लीवर एवं मसल्स में अतिरिक्त वसा मापी गयी है। मधुमेह रोगियों के शरीर और आंत में उच्च वसा के स्तर के साथ-साथ इंसुलिन और सी-पेप्टाइड का स्तर भी अधिक पाया गया। जबकि, उनकी मांसपेशियों का द्रव्यमान बहुत कम पाया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, लोगों के लीवर और अग्नाशय में छिपी वसा कम उम्र में भी इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ावा देकर मधुमेह को दावत दे सकती है। इंसुलिन सक्रियता बढ़ाने वाली दवाओं के उपयोग और वजन कम करने के तौर-तरीके अपनाने से ऐसे मरीजों को फायदा हो सकता है।
इंसुलिन हार्मोन की सक्रियता इसलिए जरूरी
स्टडी टीम का नेतृत्व करने वाले फोर्टिस-सीडॉक के चेयरमैन डॉ.अनूप मिश्रा ने बताया कि “भारतीय लोगों में सामान्य वजन के बावजूद उच्च शारीरिक वसा और मांसपेशियों का द्रव्यमान कम होता है। उनका मोटापा बाहर से देखने पर भले ही पता न चले, लेकिन पाचन से जुड़े महत्वपूर्ण अंगों, जैसे- अग्नाशय और लीवर में वसा जमा रहती है। ऐसी स्थिति में इंसुलिन हार्मोन अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा पाता है और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।”
शोधकर्ताओं में डॉ.अनूप मिश्रा के साथ शाजित अनूप, सूर्यप्रकाश भट्ट, सीमा गुलाटी और हर्ष महाजन शामिल रहे। इस स्टडी के नतीजे रिसर्च जर्नल डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम: रिसर्च एंड रिव्यूज में पब्लिश किये गये हैं। (इंडिया साइंस वायर,भाषांतरण: उमाशंकर मिश्र )

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