Saturday, 15 May, 2021

जुल्मी के शिवालय पर ‘कुरान की आयतें’ भी

कौमी एकता का प्रतीक, हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया अनुष्ठान
न्यूजवेव@ कोटा

राजस्थान में कोटा जिले में रामगंजमंडी तहसील का गांव जुल्मी धार्मिक व पुरातत्व विरासत को आज भी सहेजे हुये है। झालावाड़ राजघराने की रियासत में शामिल यह छोटा सा गांव कोटा स्टोन की खदानों के साथ ही वर्षों पुराने मंदिरों व मस्जिद से भी जाना जाता है। यहां के अनूठे शिवालय दर्शनीय व शोध के विषय है। वर्षों पुराने एक शिवालय पर कुरान शरीफ की आयतें अंकित होने से बाहर के श्रद्धालुओं की जिज्ञासा और बढ़ जाती है। वहीं दूसरा शिवालय चतुर्मुखी है, एक कंुड के पास स्थित तीसरे शिवालय की आकृति औंकारेश्वर स्थित शिवलिंग जैसी है। चौथे शिवालय से मस्जिद की दीवार सटी हुई है। वहीं पाँचवां शिवालय नीलकण्ठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। इसी मंदिर में नीलकण्ठ महादेव की विशाल प्रतिमा भी है जो एक ही पत्थर पर उकेरी हूई शिल्पकला का अद्वितीय नमूना है।
ऐतिहासिक शिवालयों की पृष्ठभूमि के कारण इस गांव का प्राचीन नाम शिवपुरी रहा किंतु तीनों ओर से जल से घिरी हुई होने के कारण इसे जलमही कहा जाने लगा। जिसे ग्रामीण भाषा में लोग जरमी पुकारने लगे। आजादी के बाद धीरे-धीरे जरमी से यह जुल्मी हो गया। पहले यह खींची राजवंश के अधीन था। उस समय यहां एक कुंड का निर्माण भी करवाया। बुजुर्गों ने बताया कि इस जलकुण्ड में आज तक कोई व्यक्ति डुबकर नहीं मरा। यदि तैरने से अनजान व्यक्ति भूलवश जलकुंड में गिर भी गया तो स्वयं ही तैरकर बाहर निकला। राजवंश के महल के जर्जर खंडहर आज भी अतीत की गाथा कहते हैं, जिन्हें मठ कहा जाता है। झालावाड़ दरबार ने यहां एक बगीचे का निर्माण करवाया था जिसे राजबाग कहा जाता है। इसी में एक मंदिर है, जिसमें भगवान लक्ष्मीनाथ की प्रतिमा विराजित की गई। इस मंदिर को राजमंदिर कहा जाता है।
गजनबी से भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ
गांव के वयोवृद्ध व सेवानिवृत प्रधानाचार्य पं. चन्द्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि मुगलकाल में जब महमुद गजनबी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था तब रास्ते में आने वाले सारे मंदिरों को क्षति पहुंचाई थी किंतु वे जब जुल्मी के उक्त शिवालय को क्षतिग्रस्त नहीं कर सके तो इस पर कुरान शरीफ की आयतें अंकित करवा दी। पूर्व सरपंच राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि उक्त मंदिर का जीर्णोद्धार 25 वर्ष पूर्व उपस्वास्थ्य केन्द्र के तत्कालीन प्रभारी कम्पाउंडर रमेशचन्द सक्सेना द्वारा करवाया गया। गांव जुल्मी में लगभग दस प्राचीनतम मंदिर हैं, जिनके शिलालेख अपनी गाथा स्वयं कहते हैं। मंदिर व मस्जिद पास-पास होने से यह गांव कौमी एकता की मिसाल बना। सावन के अधिक मास के दौरान बडी संख्या में शिवभक्त यहां के शिवालयों में जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। सोमवार को हरियाली अमावस्या पर शिव मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान जारी रहे।

(Visited 418 times, 1 visits today)

Check Also

श्रीमद् भागवत अमृत ज्ञान सप्ताह का शुभांरभ 21 मार्च से

स्टेशन रोड स्थित श्रीराम मंदिर में कलश यात्रा से प्रांरभ होगा धार्मिक आयोजन न्यूजवेव@ कोटा शहर …

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: