Saturday, 13 April, 2024

हैंगिग ब्रिज पर दौडे़ विकास के पहिए

विकास का सेतुः सिंगल प्लेन केबल पर टिका यह मेगा पुल राजस्थान, मध्यप्रदेश व गुजरात के बीच आवागमन एवं विकास की उम्मीदों का सेतु बना। हवाईसेवा से जुड़ने के बाद र्हैंगिंग ब्रिज चालू हो जाने से एजुकेशन हब में पर्यटन बढ़ने की संभावना जागी।

Chambal Hanging Bridge

अरविंद, कोटा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ईस्ट-वेस्ट कोरिडोर परियोजना में अहम सेतु माने जाने वाले चंबल नदी हैंगिंग ब्रिज का लोकार्पण कर तीन राज्यों के लिए सड़क मार्ग की राह आसान कर दी। प्रधानमंत्री ने 29 अगस्त,2017 को 9 वर्ष में तैयार हुए मेगा ब्रिज पर आवागमन चालू करने की हरी झंडी दिखाई, जिससे लाखों नागरिकों के चेहरे खिल गए।
एनएचएआई राजस्थान के मुख्य महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन ने बताया कि स्टील केबलों से बने ब्रिज की मजबूती ज्यादा होती है तथा ये परंपरागत केंटी लीवर से बने पुलों से ज्यादा लम्बे होते हैं। एक केबल पर टिके ब्रिज पर एक से अधिक टॉवर होती हैं। इसे अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है।
देश में केबल आधारित मेगा ब्रिज
1. विद्यासागर सेतु- पश्चिम बंगाल में हुगली नदी पर बना यह ब्रिज एशिया में सबसे लम्बा है।
2. बांद्रा-वर्ली सेतु- मुंबई में बांद्रा एवं वर्ली को जोड़ने वाले इस सेतु पर 5.6 किमी कांक्रीट से निर्मित सड़क है। 420 फीट उंची टॉवर मुंबई में दूर से पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करती है।
3. न्यू यमुना ब्रिज- इलाहाबाद में इसी तर्ज पर बना लम्बा ब्रिज
4. निवेदिता सेतु- कोलकाता के पास हुबली नदी पर बना यह सेतु विकास की राह पर मील की पत्थर साबित हुआ।
5. अक्कार ब्रिज- सिक्किम में सिंगल केबिल पर बना यह ब्रिज भारतीय सीमा से जुडे़ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ता है।
6. हरिद्वार ब्रिज- गंगा किनारे महत्वाकांक्षी हरिद्वार ब्रिज से करोड़ो देशवासियों को लाभ मिल रहा है।
7. राजाभोज केबिल ब्रिज- भोपाल में 220 मीटर लंबी केबल से निर्मित ये सेतु उपयोगी एवं दर्शनीय है।
क्या है तकनीकी खूबियां-
– ईस्ट-वेस्ट कोरिडोर से तीन राज्यों के सड़क मार्ग से जुड़ाव
– 9 वर्ष में अत्याधुनिक तकनीक से हुआ तैयार
– 213.58 करोड़ रूपए निर्माण लागत
– 1.4 किमी लम्बाई, 410 फीट उंचाई व 30 मीटर चौड़ाई
– चंबल नदी से 60 मीटर उंचा
– 1150 फीट (350 मीटर) लंबे मुख्य स्पान (प्लेन केबल) पर टिका।
– दोनों ओर नॉइल बैरियर व दुर्घटना से बचाव के लिए क्रेश बैरियर व सेफ्टी ग्लास
– जापान से आयातित हाईस्पीड स्टील केबलों पर टिका रहेगा।
सड़क परिवहन में यह फायदा
– देश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी
– चित्तौड़ से कोटा होते हुए बारां-शिवपुरी नेशनल हाईवे-76 से जुड़ाव
– जयपुर से बारां की ओर बाइपास से जाने पर 30 किमी की दूरी कम हुई।
– रावतभाटा से झालावाड़ रोड़ ब्रिज से लिंक होने से 16 किमी दूर घटी।
– जयपुर-जबलपुर हाईवे पर भारी वाहन बाहर से गुजरने से सड़क हादसे थमे।

हाडौती में पर्यटन को लगे पंख

आंकडे़ देखें तो 2011 में कोटा शहर की जनसंख्या 10 लाख 1365 थी, जो इस वर्ष 12 लाख से अधिक पहुंच गई। विभिन्न राज्यो के 1.75 लाख कोचिंग विद्यार्थी अध्ययनरत होने से साक्षरता 83.65 प्रतिशत तथा ग्रोथ रेट 24.35 प्रतिशत है। 221.36 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले इस शहर का आबादी घनत्व 318 प्रति वर्ग किलोमीटर है। सघन आबादी में यह दूसरे नंबर पर है। सड़क दुर्घटनाओं से प्रतिवर्ष औसतन 125 मौते हो रही थी, जिसमें से 50 भारी वाहनों से होती हैं। हैंगिंग ब्रिज का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चालू होने से ये दुर्घटनाएं थमी हैं। ब्रिज के दोनों ओर डेढ़-डेढ़ मीटर चौडे़ फुटपाथ बनाए गए, जहां से पर्यटन चंबल नदी का विहंगम दृश्य एवं घडि़याल सेंचुरी देख सकेंगे। पुल के दोनों ओर नॉइज बेरियर लगाए गए हैं जिससे यहां से गुजरने वाले भारी वाहनों का शोर नीचे चंबल नदी के घडि़याल सेंचुरी तक नहीं पहुंचेगा। ब्रिज के दोनों ओर 15-15 मीटर चौडे़ पार्क विकसित किए गए हैं।

उत्तरी भारत का केरल

एजुकेशन हब में इंट्रा स्टेट हवाईसेवा और चंबल हैंगिंग ब्रिज चालू हो जाने से टूरिज्म तेजी से विकसित हुआ। हाड़ौती के पयर्टन सर्किट में कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ जिलों में समृद्ध हैरिटेज, ऐतिहासिक किले, नदियों के संगम व बांध होने से यह क्षेत्र विदेशी सैलानियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। दक्षिण पूर्वी राजस्थान में चंबल नदी की विंहंगम जलधारा एवं खूबसूरत वदियां होने से हजारों विदेशी पर्यटक इसे उत्तरी भारत का केरल मानकर प्रतिवर्ष सड़क मार्ग से यहां आते हैं।
हैंगिंग ब्रिज से यह समूचा क्षेत्र नेशनल कोरिडोर से जुड़ गया। सभी राज्यों से भारी वाहनों का आवागमन आसान होने से यहां विकास की नई राह खुली है। हाडौती टूरिज्म डेवलपमेंट सोसायटी का मानना है क यह ब्रिज टूरिज्म में प्रमुख आकर्षण केंद्र बनकर उभरा। चंबल किनारे मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य होने से यहां की अच्छी लोकेशन पर बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग होने की संभावनाएं जाग उठी हैं।

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