Sunday, 21 July, 2024

देश के लिए युवा वैज्ञानिक तैयार कर रहा है कोटा

राजस्थान के इस छोटे शहर में आईआईटी, एआईपीएमटी, एम्स, केवीपीवाय, आईजेएसओ, एनटीएसई और कई इंटरनेशनल ओलिंपियाड की तैयारी कर रहे 30 फीसदी से ज्यादा छात्र आईआईटी से बीटेक, एमटेक या मेडिकल कॉलेज से डिग्री करके नए क्षेत्रों में रिसर्च करना चाहते हैं।

– देश में 33 करोड 30 लाख शिक्षित युवा हैं।
– हमारी 66 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है।
– हमारे पास 25 वर्ष से कम उम्र के 55 करोड युवाओं की वर्कफोर्स है।
– विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी, एनआईटी, यूनिवर्सिटीज एवं रिसर्च सेंटर आदि को चलाने के लिए 40 हजार क्वालिफाइड साइंटिस्ट की जरूरत है।
कोेटा। देश में बेसिक साइंस पढकर रिसर्च करने वाले स्टूडेंटस की सबसे बडी संख्या राजस्थान के छोटे शहर कोटा में हैै। यहां हर साल करीब 1‐50 लाख छात्र फिजिक्स, केमिस्टी, मैथ्स और बायोलॉजी पढते हुए आईआईटी-जेईई, एम्स, एआईपीएमटी जैसी प्रमुख परीक्षाओं के साथ-साथ एनटीएसई और कई इंटरनेशनल ओलिंपियाड की तैयारी कर रहे हैं। कई मेधावी छात्रों ने 11वीं और 12वी की पढाई के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीते हैं। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, आईआईएसई या नासा के वैज्ञानिकों से रूबरू होने के बाद ये छात्र देश के लिए नए क्षेत्रों में रिसर्च करना चाहते हैं।
किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाय) के जरिए प्रतिवर्ष 1000 युवाओं को रिसर्च फैलोशिप दी जा रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) नेे साइंस पैराशूूट फॉर इंस्पायर रिसर्च ( प्देचपतम) प्रोग्राम लांच किया है, जिसमें साइंस के 10 लाख विद्यार्थियों और युवा स्कालर्स को मदद दी जाएगी।
पौलेंड में हुए 18वें इंटरनेशनल जूनियर एस्ट्रोनॉमी ओलिंपियाड में गोल्ड मेडल जीतने वाले भव्य चौधरी आईआईटी में सलेक्ट होकर आगे फिजिक्स में रिसर्च करना चाहते है। इसी में गोल्ड मेडल जीतने वाले भोपाल के छात्र चार्ल्स राजन भी फिजिक्स में कुछ नया रिसर्च करके देश का नाम रोशन करना चाहता है।
इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलिंपियाड (आईईएसओ) एवं इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलिंपियाड (आईसीएचओ) में गोल्ड मेडल जीतने वाले उदयपुर के यश गुप्ता आईआईटी मुंबई से बीटेक कर रहे हैं। आगे वे रिसर्च करने के लिए किसी फॉरेन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करना चाहते हैं। मात्र 13 साल की उम्र में आईआईटी-जेईई क्रेक करके आईआईटी, कानपुर से बीटेक कर रहा बिहार के सत्यम कुमार आईआईटी में रहते हुए रोबोटिक्स में कुछ नई खोज करने में जुटा है।
मथुरा के छात्र गौरव वर्मा ने इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलिंपियाड में गोल्ड मेडल जीता। एनटीएसई स्कॉलर गौरव आईआईटी-जेईई एडवांस में सलेक्ट हो गए। वे बीटेक करके जॉब करने की बजाय पीएचडी करके वैज्ञानिक के रूप में देश की सेवा करना चाहते हैं। कानपुर के पार्थ शर्मा को जेईई-एडवांस में रैंक-119 मिली। वे बीटेक करके नए क्षेत्र में रिसर्च करेंगे। जयपुर के पार्थ शाह ने इंटरनेशनल फिजिक्स ओलिंपियाड में गोल्ड मेडल लेकर आईआईटी में एडमिशन ले लिया। वह फिजिक्स के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अनुसंधान करेगा।
केवीपीवाय में एआईआर-2 के साथ फैलोशिप लेने वाले मुंबई अनिकेत वाजपेयी आईआईटी पहुंचे। निजित शर्मा एवं उमंग गुप्ता आईआईटी कर रहे हैं, आगे चलकर वे किसी नए क्षेत्र में रिसर्च करेंगे। रमन शर्मा आईआईटी से बीटेक करके फिजिक्स में रिसर्च करेंगे। केमिस्ट्री में अंतरराष्ट्रीय रजत पदक जीतने वाली श्रुति खत्री आईआईटी से बीटेक करकेे केमिस्ट्री में शोेध करेगी।
दुनिया को दिखाया, नॉलेज में हम पीछे नहीं
इंटरनेशनल ओलिंपियाड की तैयारी करवाने में अग्रणी नेशनल काउंसलर एवं वायब्रेंट एकेडमी में एज डिविजन के प्रमुख नीलेश गुप्ता कहते हैं कि हमें गर्व है कि स्कूली छात्र इंटरनेशनल ओलिंपियाड के फाइनल राउंड में चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस, यूएसए, ब्रिटेन जैसे देशों के छात्रों से कडा मुकाबला करते हुए भारत के लिए निरंतर पदक जीत रहे हैं। मेडिकल की तरह इंजीनियरिंग में भी सुपर स्पेशलिटी का दौर आ गया है। रिसर्च में नए अवसर सामने आ रहे हैं। युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।
रिसर्च, नॉलेज व लर्निंग से होंगे पावरफुल
आकाश गंगा सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी, बदलपुर (महाराष्ट्र) के डायरेक्टर भरत नागेश अदुर नेे कहा कि इंटरनेेशनल एस्ट्रोनामी ओलिंपियाड में बच्चों ने दुनिया के सामने प्रतिभा साबित कर दी। अब हमें एस्ट्रोनॉमी में भारतीय अनुसंधान व उपलब्धियों को नई पीढी के साथ जोडना होगा।
एएमटीआई से जुडे प्रख्यात गणितज्ञ एस आर संथानम कोटा में बच्चों की मैथेमेटिकल स्किल जानकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंनेे कहा कि देश के यंग माइंडस में मैथ्स का टेलेंट बहुत है। इंटरनेशनल मैथ्स ओलिंपियाड में निरंतर पदक जीतना देश के लिए बडी उपलब्धि है। इंडियन काउंसिल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्टेªशन, नईदिल्ली वाइस चेयरमैन प्रो‐ बीएम शर्मा का कहना है कि भारत की 40 प्रतिशत आबादी 15 से 35 वर्ष के युवाओं की है। उनमें अपार क्षमताएं हैं। अगले 10 वर्षों में रिसर्च, नॉलेज व लर्निंग के बल पर दुनिया में सबसे पावरफुल बन सकते हैं।

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