Monday, 27 June, 2022

RTI के जरिए कैसे हो सरकारी सिस्टम में बदलाव

सूचना के अधिकार पर 99वीं राष्ट्रीय वेबिनार में पूर्व सूचना आयुक्तों ने कहा- सरकारी विभागों में अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
न्यूजवेव @ भोपाल

‘बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता बढ़ाने, सिस्टम को सुधारने में और भ्रष्टाचार निवारण में आरटीआई की भूमिका‘ विषय पर 99 वीं राष्ट्रीय आरटीआई वेबिनार में मध्यप्रदेश के पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, हरियाणा के पूर्व सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्मानी, और वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने देशभर से नागरिकों के सवालों के जवाब दिये। संचालन व संयोजन RTI एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने किया।
दस्तावेजों दिखाने की जगह सिर्फ निरीक्षण के आदेश नहीं दे सकते अफसर


वेबिनार में विशिष्ट अतिथि पूर्व मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि सूचना का अधिकार केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह सार्वजनिक व्यवस्था व सरकारी सिस्टम में जरूरी बदलाव या सुधार कराने का प्रभावी उपकरण है। एक आवेदक के प्रश्न पर उन्होंने बताया कि आरटीआई कानून में यदि दस्तावेज मांगे गए हैं तो दस्तावेज दिए जाने चाहिए एवं निरीक्षण मांगा गया है तो निरीक्षण करवाया जाना चाहिए। लोक सूचना अधिकारी आरटीआई में मांगे गए दस्तावेज देने के स्थान पर, मनमाने ढंग से आवेदक को दस्तावेजों का निरीक्षण करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है ।
फिजियोथैरेपिस्ट व आरटीआई कार्यकर्ता डॉ.प्रकाश अग्रवाल ने रेलवे मंत्रालय में आरटीआई लगा जानकारी चाही कि रेल टिकट जो कंफर्म नहीं होते हैं, वेटिंग रहते हैं ,उनके निरस्तीकरण के बाद किन नियमों के तहत नाजायज कैंसिलेशन चार्ज, कन्वीनियंस चार्ज, बैंक शुल्क आदि किस आधार पर काटा जाता है ? रेलवे विभाग ने उनके आवेदन को कई जगह घुमाया, अंत में इतना जवाब प्राप्त हुआ कि रेलवे के नियमों के तहत ही कार्यवाही की जाती है और शुल्क काटा जाता है।
संतोषप्रद उत्तर ना मिलने पर डॉ अग्रवाल ने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील की तो मामले का निराकरण हुआ। आयोग ने रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को निर्देश दिया कि वे ऑनलाइन और ऑफलाइन बुक कराए गए रेल टिकटों पर की जाने वाली नाजायज वसूली, खासकर कैंसिलेशन से जुड़े चार्जेस पर विचार कर आवश्यक सुधार करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन डिजिटल इंडिया के तहत सभी सेवाएं कम से कम शुल्क पर और आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।
आत्मदीप ने बताया कि RTI के जरिए पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरीफिकेशन की प्रक्रिया में आवश्यक सुधार हुए हैं, पुलिस वेरीफिकेशन के नियम और समय सीमा भी तय हुई है। बैंकिंग लोकपाल कार्यालयों की हेल्पलाइन और शिकायत निवारण व्यवस्था में जरूरी सुधार हुए हैं। लोगों के डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पर बैंकों द्वारा बाय डिफॉल्ट लागू किया गया CNP फीचर बंद हुआ है ,जिससे लोग साइबर ठगी से बचे हैं।
जब तक जवाबदेही तय नहीं, आरटीआई कानून का औचित्य नहीं
हरियाणा के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र धर्मानी ने बताया कि RTI कानून में अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं है। सरकारी विभागों में निचले स्तर के कर्मचारी को लोक सूचना अधिकारी बनाया जाता है, जबकि उसमें विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, तभी कुछ हो पाएगा। आरटीआई कानून के तहत जो जुर्माने की कार्यवाही की जाती है ,वह वरिष्ठ अधिकारियों की सर्विस बुक में भी दर्ज हो पेनल्टी वसूलने की त्वरित व्यवस्था हो।
उन्होंने बताया कि आरटीआई कानून को 17 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। आज तक जनता के बड़े हिस्से तक सूचना के अधिकार की पर्याप्त जानकारी नहीं पहुंची है। धारा 4(1)(बी) में बहुत सारी ऐसी जानकारियां हैं ,जो कानून के क्रियान्वयन के 120 दिन में जनता को साझा की जानी चाहिए थी लेकिन यह आज भी पूरी नहीं हुई जो चिंता का विषय है।
जनहित की सुरक्षा का औजार है RTI
भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘‘ओपन आई‘‘ मैगजीन के संपादक रमेश शर्मा ने कहा कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारियों से जो कमियां उजागर हुई, उन्हें उच्चाधिकारियों तक पहुंचा कर 20 से अधिक मामलों में उन्होंने व्यवस्था में सुधार कराने में सफलता पाई। उन्होंने समय-समय पर आरटीआई से काफी जानकारियां एकत्रित की,उन्हें अपनी पत्रिका में प्रकाशित किया और उनसे सामने आए मुद्दों को संबंधित मंच ऊपर उठाकर सार्वजनिक हित में आवश्यक निर्देश जारी कराएं।
उन्होंने RTI से जुडे़ कटु अनुभव भी साझा किये,जिसमें अफसरों ने उन्हें किस तरह टॉर्चर किया और यहां तक कह डाला कि यह व्यक्ति आरटीआई लगाकर ब्लैकमेल कर रहा है। लेकिन वे अपने कर्तव्य मार्ग पर अडिग रहे। उन्होंने आरटीआई लगा कर आवासीय व व्यवसायिक भवन, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल,रेस्टोरेंट आदि द्वारा कचरे के निष्पादन सहित पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं लिए जाने की जानकारी हासिल की और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने यह मामला उठाया। इस पर NGT ने आवश्यक निर्देश जारी कर इन संस्थानों को पर्यावरणीय मंजूरी लेने और कचरे व सीवेज के समुचित निपटारे के लिए पाबंद किया।

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