Wednesday, 28 February, 2024

विज्ञान से विकास की नई उड़ान

नवनीत कुमार गुप्ता
न्यूजवेव @ नईदिल्ली
साइंस एंड टेक्नोलॉजी में भारत दुनिया के शीर्ष देशों की सूची में आ गया है। स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण, शोध, कृषि, उर्जा सहित कई क्षेत्रों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी से रिसर्च एवं इनोवेशन में कई अत्याधुनिक प्रयोग सफल हो रहे हैं।
हैल्थ केअर की बात करें तो सस्ती एवं स्वदेशी तकनीक सोहम वरदान साबित हो रही है। बायो टैक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से नवजात शिशुओं में सुनने की क्षमता की जांच के लिए ‘सोहम’ तकनीक विकसित की गई है।

इसी तरह, बच्चों की नाक की सफाई के लिए ‘नोक्सेनो’ तकनीक से बिना दर्द के उपचार के उपकरण विकसित किये गये हैं। हैल्थ केअर में रोटावायरस, मलेरिया और डेंगू के लिए कम लागत वाले स्वदेशी टीकों का डवलपमेंट मील का पत्थर साबित हो रहा है। दिव्यांगों के लिए भी एसेसरीज विकसित की गई हैं।
‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा स्वच्छ ऊर्जा के लिए सुपर क्रिटिकल कार्बन डाय आक्साइड ब्रैटन टेस्ट लूप सुविधा विकसित की गयी। साथ ही, निर्धारित समय में नदी जल एवं वायु गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए ‘सक्षम-2018’ विकसित कर पर्यावरण को साफ रखने की कोशिशें जारी हैं। जैव शौचालय जैसी वैज्ञानिक तकनीक रेलवे में लागू करने से सुखद परिणाम मिल रहे हैं।
इंटरनेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट में लिगो गुरुत्वाकर्षण तरंगों का प्रवाह, स्वच्छ ऊर्जा के लिए मिशन इनोवेशन एवं ब्रहांड के अवलोकन में मददगार 30 मीटर दूरबीन का निर्माण किया गया है। रिन्यूएबल एनर्जी में भारत अग्रणी देशों की श्रेणी में आ रहा है। भारत ने इंटरनेशनल सोलर एग्रीमेंट की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है।

रूरल टेक्नोलॉजी ने किसानों का हौसला बढ़ाया
दूर-दराज तक पहुंच बनाने के लिए नॉर्थ-ईस्ट के रिसर्च इंस्टीट्यूट को ट्विनिंग प्रोग्राम द्वारा मुख्य धारा से जोड़ा गया है। रूरल टेक्नोलॉजी में 20 लाख किसानों तक स्वदेशी गणितीय मॉडल और प्रत्युष एवं मिहिर जैसी उच्च कंप्यूटिंग क्षमता के माध्यम से तालुका स्तर पर प्रभावी मौसम पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं, जिससे किसानों की आय को दोगुना करने में मदद मिल रही है। जलवायु परिवर्तन और कीटों से लड़ने में सक्षम पौधों की उन्नत किस्मों के विकास ने किसानों को नया हौसला दिया है।

प्रतिभाओं के लिए कई फैलोशिप प्रोग्राम
केंद्र सरकार द्वारा कई फैलोशिप प्रोग्राम के जरिए युवा प्रतिभाओं को साइंस की ओर आकर्षित किया जा रहा है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय की योजनाओं जैसे- स्वर्ण जयंती फैलोशिप, शोध उत्कृष्टता के लिए रिसर्च एक्सीलेन्स के लिए टीचर एसोसिएटशिप, ओवरसीज विजिटिंग डॉक्टरल फेलोशिप, विजिटिंग एडवांस्ड संयुक्त रिसर्च, लोकप्रिय विज्ञान लेखन के लिए अवसर योजना एवं स्कूली बच्चों के लिए सीएसआईआर का वैज्ञानिक-विद्यार्थी विचार-विमर्श प्रोग्राम किशोरों में साइंस के प्रति जिज्ञासा पैदा कर रहे हैं।

हर क्षेत्र में डिजिटल इंडिया की झलक
डिजिटल इंडिया को प्रोत्साहन करने के लिए विज्ञान मंत्रालय कई योजनाएं चला रहा है। इसके द्वारा पुरातत्व विरासत हम्पी का साइबर-फिजिकल पुनर्निमाण किया गया है, जिससे पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की हैं। इमेजिंग स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं अनुप्रयोग के कार्यक्रम चलाये गये हैं।
इतना ही नहीं, इंटरनेट व वाय-फाय सुविधा से साइंस प्रोग्राम का लाइव प्रसारण लोगों को साइंस से जोड़ रहा है। इसके लिए रिसर्च वर्क प्रोजेक्ट एवं फैलोशिप की जानकारी देने वाली वेबसाइट जल्द ही लांच होने जा रही है। उच्च प्रभाव वाले जर्नल को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए ई-लाइब्रेरी कंसोर्टियम प्रारंभ किया गया है।

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