Saturday, 28 February, 2026

धूप में बैठकर भी कथा सुनो, कल अच्छा फल मिल जायेगा- पंडित प्रदीप मिश्रा

शिव महापुराण कथा : कोचिंग विद्यार्थियों से बोले- माता-पिता का घर हमेशा तुम्हारे इंतजार में रहता है
न्यूजवेव @ कोटा

कुबेरेश्वर धाम के आचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा ने रविवार को कोटा में आयोजित शिव महापुराण कथा के प्रथम सोपान में कहा कि शिव महापुराण कथा में 24 हजार श्लोक हैं, जिसमें शिव की अविरण भक्ति निहित है। जिस भाव से कथा सुनते हैं, भगवान उस भाव से कामना पूरी कर देते हैं। यदि धूप में बैठकर भी मन से कथा श्रवण करेंगे तो बाबा का फल कल ही मिल जायेगा, कथाओं में बाबा के भक्तों को वीआईपी बनने की आवश्यकता नहीं है।


श्रद्धालुओं से खचाखच भरे दशहरा मैदान में सुबह से आसपास के क्षेत्रों से भक्तों का आना जारी रहा। दोपहर 2 बजे तक मैदान के सारे पांडाल भर गये। हजारों भक्त तेज धूप में छाया और पानी के लिये तरसते रहे। दूसरी ओर आयोजन समिति ने वीआईपी पास बांटकर सम्पन्न वर्ग को विशेष दीर्घा में बिठाया जबकि गरीब व बुजुर्ग महिलायें पीछे खुले मैदान में बैठने पर मजबूर हो गई। कथा में 90 प्रतिशत उपस्थिति महिलाओं की थी लेकिन व्यवस्थायें अनुकूल नहीं होने से चारों ओर भगदड़ व कौतूहल का वातावरण बना रहा। श्रद्धालु पं. मिश्रा की एक झलक देखने को लालायित रहे। लेकिन माइक व्यवस्था में गडबडी होने से नहीं होने से पांडाल के बाहर बैठे श्रोता प्रवचन नही सुन सके। वे देर तक धूप में खडे रहे।
कथा के प्रारंभ में केंद्रीय व्यापार एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं विधायक संदीप शर्मा ने पं. मिश्रा का स्वागत करते हुये कोटा की धरती पर कथा में मौजूद मातृशक्ति को नमन किया। बिरला ने कहा कि इस कथा से कोटा की धरती शिव नगरी बन गई है। पं.मिश्रा ने कहा कि राजस्थान वीरों की भूमि है। जब महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर सनातन धर्म की रक्षा की थी तो आज आप गाय को घास खिलाकर उसे बचाने का निश्चय कर लो।
शिक्षा गिरना नहीं, उठना सिखाती है
आचार्य पं. प्रदीप मिश्रा ने कोचिंग विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा हमें सफलता की ओर ले जाती है, परीक्षा, टेस्ट या इंटरव्यू हमें मानसिक बल देते हैं, गिरना नहीं सिखाते हैं। तुम्हारे माता-पिता ने यहां पढने के लिये भेजा है, यह नहीं कहा कि कभी लौटकर मत आना। माता-पिता का घर हमेशा तुम्हारा इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक बार ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा, तुम्हारे पिता कौन हैं। विष्णु ने भगवान शंकर का नाम लिया। इस पर वो बोले, वह तो भस्म लगाते हैं, श्मशान में रहते हैं, सांप को गले में डालकर रहते हैं, उनका कोई घर नहीं है। इस पर विष्णु ने जवाब दिया, मुझे उन पर गर्व है। क्योंकि एक पिता अपने बच्चे को सब कुछ दे देता है, खुद वीराने में बैठ जाता है। आपके पिता खुद पुरानी पेंट-शर्ट व फटी बनियान पहन लेंगे लेकिन बच्चों को अच्छे कपडे पहनाकर ही स्कूल या बाहर पढने भेजते हैं। इसलिये माता-पिता को सदैव याद रखना।

(Visited 2,370 times, 1 visits today)

Check Also

JEE-Main 2026 : देश के 12 टॉपर स्टूडेंट्स में 8 एलन से

एलन क्लासरूम छात्र कबीर को मिला 300 में से 300 स्कोर न्यूजवेव@कोटा  एनटीए द्वारा जेईई-मेन …

error: Content is protected !!