Tuesday, 23 April, 2024

डाॅक्टर बनने की चाहत दोगुना बढ़ी, इंजीनियरिंग में कम हुआ रूझान

उच्च शिक्षा में बदलाव: नीट-यूजी में 11.38 लाख परीक्षार्थियों ने दी नीट-यूजी, मेडिकल में 3.33 लाख विद्यार्थी बढ़ गए जबकि 10.20 लाख ने दी जेईई-मेन, इस वर्ष इंजीनियरिंग में 1.74 लाख विद्यार्थी कम हुए।
अरविंद
मेडिकल की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी,2017 ने उच्च शिक्षा में छात्रों के बदलते रूझान का संकेत दे दिया। जेईई-मेन में 11 लाख से कम तथा मेडिकल में 11 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी होना भविष्य में कॅरिअर की दिशा को इंगित करता है। राज्यसभा में एमएचआरडी राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने माना कि गत तीन वर्षों में जेईई-मेन में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटी है। जबकि इन तीन वर्षों में मेडिकल के विद्यार्थी दो गुना बढ़ गए। इस वर्ष नीट में 3.33 लाख (41.42 फीसदी) परीक्षार्थी ज्यादा रहे।
देश के प्रीमियर आईआईटी, एनआईटी तथा शीर्ष मेडिकल काॅलेजों में दाखिले के लिए इस वर्ष 22 लाख से अधिक स्टूडेंट्स दो राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं जेईई-मेन तथा नीट-यूजी में शामिल हुए। इनमें 80 प्रतिशत छात्र कक्षा-9 से ही इंजीनियरिंग या मेडिकल कोचिंग ले रहे हैं। 17 से 25 वर्ष की उम्र तक वे 3-4 वर्ष रैंक सुधारने का प्रयास करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल में रूझान बढ़ने का मुख्य कारण यह कि एकल प्रवेश परीक्षा नीट लागू हो जाने से सभी राज्यों के विद्यार्थियों को मेडिकल काॅलेजों में एडमिशन के लिए योग्यता के आधार पर एक समान अवसर मिले। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से प्राइवेट काॅलेजों द्वारा एडमिशन प्रक्रिया में लाखों रूपए की केपिटेशन फीस व डोनेशन लेने की प्रवृŸिा पर रोक लगी। केंद्र सरकार ने इस वर्ष देश में 58 मेडिकल काॅलेजों को अपग्रेड करके एमबीबीएस की 10 हजार सीटें बढ़ाई। जिससे इस वर्ष से प्री-मेडिकल की तैयारी कर रहे सभी विद्यार्थियों को 67,000 एमबीबीएस पर एडमिशन लेने का विकल्प मिला।
एमएमएस मेडिकल काॅलेज,जयपुर के काॅर्डियोलाॅजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ.रीतेश गुप्ता के अनुसार, देश में डाॅक्टर्स की कमी होने से मेडिकल जैसे नोबल प्रोफेशन में कॅरिअर ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं। एमबीबीएस या बीडीएस करने के बाद ग्रेजुएट छात्र पीजी व स्पेशलाइजेशन करते हैं। इसके बाद वे उंचे पैकेज पर सर्विस अथवा खुद क्लिनिक या हाॅस्पिटल सेटअप खड़ा कर रहे हैंे।
मांग से अधिक हुए इंजीनियरिंग ग्रेजुएट
दूसरी ओर, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की उपलब्धता इंडस्ट्री व सर्विस सेक्टर की मांग से कई गुना ज्यादा हो गई। देश में 8 लाख में से 5 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट बेरोजगार रह जाते हैं। जिन्हे बहुराष्ट्रीय कंपनियों में जाॅब मिला, उन्हें छंटनी का डर निरंतर सताता है। लोकसभा उपाध्यक्ष श्री एम थंबी दुरै के अनुसार, तकनीकी संस्थानों में पुराने कोर्स और सिलेबस पढ़ाए जा रहे हैं, जबकि इंडस्ट्री की डिमांड प्रैक्टिकल लर्निंग की है। ए, बी व सी ग्रेड के काॅलेज से निकले बीटेक ग्रेजुएट निम्न पदों के लिए भी आवेदन करने लगे। अच्छे तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले इंजीनियरिंग ग्रेजुएट प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा मेक इंन इंडिया जैसे कैम्पेन से प्रभावित होकर जाॅब करने की बजाय अब स्टार्टअप या स्किल इंडिया में कुछ नया कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा उन्हें लोन, सब्सिडी सहित अन्य विŸाीय सुविधाएं मिल रही हैं।

2017 में दो प्रवेश परीक्षाओं का रूझान
परीक्षा    पंजीकृत विद्यार्थी ब्वाॅयज   गल्र्स (लाख में)
जेईई-मेन 11,22,252   8.56    3.29
नीट-यूजी 11,38,888   4.97     6.41

पांच वर्षों का तुलनात्मक ग्राफ –
वर्ष जेईई-मेन नीट
2013 12.82 6.58
2014 12.90 6.16 (एआईपीएमटी)
2015 12.34 6.32 (एआईपीएमटी)
2016 11.94 8.02
2017 10.20 11.38
(परीक्षार्थियों की संख्या लाख में)

मेडिकल में बेटियां धाकड़
इस वर्ष कुल 11.38 लाख परीक्षार्थियों में सर्वाघिक 6.41 लाख बेटियां हैं, जबकि लडकों की संख्या 4.97 लाख है। इस वर्ष 1.45 लाख ज्यादा बेटियां पेपर देंगी। उसी अनुपात में क्वालिफाई करने में भी वे लड़कों से आगे रहेंगी। गत वर्ष नीट-2016 में कुल 8,02,594 परीक्षार्थियों में 3.37 लाख ब्वायज तथा 3.93 लाख गल्र्स शामिल थीं। जिसमें 2.26 लाख गल्र्स क्वालिफाई हुईं जबकि ब्वायज 1.83 लाख क्वालिफाई हुए थे। इस वर्ष भी डाॅक्टर बनने की होड़ में वे ब्वाॅयज को कड़ी टक्कर देंगी। जम्मू-कश्मीर की 400 से अधिक गल्र्स प्रतिवर्ष मेडिकल प्रवेश परीक्षा दे रही हैं। नीट-यूजी का रिजल्ट 8 जून को घोषित होगा।

कॅरिअर में पहली पसंद बन रहा मेडिकल
देश में उच्च शिक्षा एक नई करवट ले रही है। सर्विस सेक्टर मे आ रहें वैश्विक बदलाव से युवा काॅलेज स्तर पर कॅरिअर के सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं। आईआईटी तथा एनआईटी ग्रेजुएट कैंपस भर्ती में जाॅब आॅफर ठुकराकर स्टार्टअप तथा डिजिटल इंडिया कंसेप्ट अपनाने लगे हैं। हाल ही में यूएसए में एच-1 बी वीजा की अनिवार्यता लागू होने के बाद कई अनुभवी इंजीनियर्स देश लौट रहे हैं, जिससे भारत में प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उंचे पैकेज पर 5 से 7 वर्षों से जाॅब कर रहे आईआईटी एवं एनआईटी ग्रेजुएट्स जाॅब में असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। कंपनियों को कम पैकेज पर अनुभवी इंजीनियर्स मिल रहे हैं।
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल में पारदर्शिता लाने के उददेश्य से एकल प्रवेश परीक्षा नीट को लागू करने का निर्णय किया। जिससे पिछले 2 वर्षों में कई राज्यों के प्राइवेट मेडिकल काॅलेजों में मनमानी केपिटेशन फीस व डोनेशन पर रोक लगी। नीट लागू होने से विद्यार्थियों पर 7 से 9 अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं देने का दबाव खत्म हुआ। यही वजह है कि इस वर्ष नीट-यूजी में रिकाॅर्ड 11.38 लाख विद्यार्थी रजिस्टर्ड हुए।
एमबीबीएस की सीटें दो गुना से ज्यादा
मेडिकल का विश्लेषण देखें तो 2015 तक एआईपीएमटी के साथ विद्यार्थी 6 से 9 मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं देते थे, जिससे आर्थिक व मानसिक दबाव रहता था। 2016 में नीट लागू हो जाने से सभी राज्यों में प्रवेश के लिए समान अवसर मिले। 2013 तक 31,000 एमबीबीएस सीटों पर दाखिले हुए जबकि 2017 से नीट व एम्स के जरिए 560 अधिकृत मेडिकल काॅलेजों में 63,985 एमबीबीएस की सीटों तथा 25,900 बीडीएस की सीटों पर दाखिले होंगे। केंद्र सरकार द्वारा 58 मेडिकल काॅलेजों को अपग्रेड कर देने से इस वर्ष 10 हजार एमबीबीएस की सीटें बढ़ गईं। एक परिवर्तन यह हुआ कि इस वर्ष लडकों की तुलना में 1.44 लाख ज्यादा बेटियों ने रूचि दिखाई। कारण यह कि मेडिकल में वे कहीं भी प्रेक्टिस या जाॅब कर सकती हैं।
जाॅब सुरक्षित नहीं, इंजीनियरिंग में रूचि घटी
देश के 12 लाख स्टूडेंट्स आईआईटी तथा एनआईटी से बीटेक करने का सपना लेकर 3 से 4 वर्ष तक विभिन्न शहरों में कोचिंग लेते हैं। इनमें से 23 आईआईटी मे 11,509 तथा 31 एनआईटी, 18 ़ट्रपल आईटी, 18 केंद्र विŸा पोषित तकनीकी संस्थानों तथा 10 प्रमुख यूनिवर्सिटी के 631 प्रोग्राम में लगभग 35 हजार सीटों पर दाखिले मिलते हैं। शेष बचे हुए 11 लाख विद्यार्थियों में से 45 फीसदी राज्यों के प्राइवेट काॅलेजों से बीटेक करते हैं तथा 55 प्रतिशत अगले वर्ष दोबारा जेईई की कोचिंग लेते हैं। हालात यह है कि प्रतिवर्ष कई राज्यों के प्राइवेट इंजीनियरिंग काॅलेजों में बीटेक की 50 से 75 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं। जिसे इंजीनियरिंग काॅलेज बंद होने लगे हैं।
एक बदलाव यह भी देखने को मिला कि सामान्य प्राइवेट काॅलेज से बीटेक करने पर अच्छे पैकेज से जाॅब नहीं मिल पाता है। जिससे इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अब टीचिंग क्षेत्र में जा रहे हैं। स्कूलों में हुए एक सर्वे के अनुसार, शिक्षकों के लिए आवेदन में 40 प्रतिशत से अधिक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। इंजीनियरिंग की कोर ब्रांचों मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल, केमिकल, इलेक्ट्रानिक्स आदि से बीटेक करने वाले ग्रेजुएट आईटी कम्पनियों में जाकर रियल पोटेंशियल नहीं दिखा पाते हैं। इसलिए प्रतिवर्ष कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही है। महंगी कोचिंग एवं 4 वर्ष तक डिग्री के लिए काॅलेज एजुकेशन लेकर भी उन्हें सामान्य पैकेज पर जाॅब नहीं मिल पाता है। इससे नए छात्रों में अनिश्चितता बढ़ी है। वे इसे सुरक्षित फील्ड नहीं मान रहे।
अन्य संकायों में बढ़ा ग्राफ-
एक सर्वे के अनुसार, कक्षा-11वीं से साइंस के साथ काॅमर्स संकाय में छात्रों की रूचि बढ़ी। 12वीं के बाद देश की 17 नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी से एलएलबी के लिए 45 हजार से अधिक छात्र क्लेट की तैयारी करते हैं। सीए के लिए जून में 1.10 लाख से अधिक छात्र सीपीटी प्रवेश परीक्षा देंगे। सेंट्रल तथा कुछ अन्य यूनिवर्सिटी ने 12वीं के बाद नए वोकेशनल कोर्सेस प्रारंभ किए है। ग्रेजुएशन के बाद कैट देने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। आईटी कंपनियों में प्रोफेशनल्स की डिमांड होने से बीसीए तथा एमसीए में रूझान देखने को मिला।
कॅरिअर आॅप्शन स्कूल से दिए जाएं
स्टूडेंट्स साइंटिफिक, इकोनाॅमिक, सोशल, डिजाइनिंग क्षेंत्रों में प्रेक्टिकल लर्निंग की ओर बढ़ रहे हैं। गल्र्स को मेडिकल में स्मार्ट कॅरिअर आॅप्शन दिख रहे हैं, इसलिए इस वर्ष मेडिकल में उन्होंने नया रिकाॅर्ड बनाया। देश में स्कूल लेवल पर ही बच्चों को सभी तरह के कॅरिअर आॅप्शन के बारे में सही गाइडेंस जरूरी है। ताकि वे अपनी रूचि एवं योग्यता के अनुसार, किसी एक फील्ड में अपना स्किल दिखा सकें।
प्रदीप सिंह गौड़, सदस्य, सीनेट कमेटी, ट्रिपल आईटी, कोटा

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