Saturday, 13 April, 2024

1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा ई-वे बिल

 वर्कशॉप में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हुए ईवेबिल के संशोधनों से रूबरू, 72 घंटे रहेगी बिल की वैधता, वाहन की सूचना दिए बिना 50 किमी भेज सकेंगे माल

न्यूज वेव कोटा
देशभर में 1 अप्रैल,2018 से नया ई-वे बिल लागू हो जाएगा। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। कम्पनीज एसोसिएशन एवं वाणिज्यक कर विभाग, कोटा की कार्यशाला में संयुक्त आयुक्त एनके गुप्ता, उपायुक्त आरपी वर्मा, सहायक आयुक्त अनुपम शर्मा एवं हेल्प डेस्क प्रभारी उमंग नंदवाना ने ट्रांसपोट व्यवसायियों को इसके नियमों की जानकारी दी।

संयुक्त आयुक्त एनपी गुप्ता ने बताया कि जीएसटी की 26वीं बैठक के बाद 1 अप्रैल से ई-वे बिल पूरे देश में लागू हो रहा है। एक राज्य से दूसरे राज्य में कर योग्य 50 हजार रुपये से अधिक का सामान ले जाने के लिए ई-वे बिल जरूरी होगा। ई-वे बिल इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट केटेगरी के लिए जारी किया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने जीएसटीआर-3बी रिटर्न दायर करने के लिए जून तक का समय दिया है।

सहायक आयुक्त अनुपम शर्मा ने बताया कि जीएसटी एक्ट के तहत करयोग्य 50 हजार और इससे अधिक मूल्य के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल लगेगा। यह व्यवस्था 1 अप्रैल से इंटरस्टेट माल परिवहन के लिए लागू होगी। इससे पहले बिल में काफी बदलाव किए गए हैं। नए नियम सरल हैं। इससे व्यापारियों को माल परिवहन में बड़ी राहत मिलेगी।

सबसे बड़ी राहत ई-वे बिल की वैधता को लेकर दी गई, जिसमें अब 24 घंटे की जगह ई-वे बिल 72 घंटे तक वैध रहेगा। पहले प्रावधान था कि यदि माल 10 किमी दूर भेजा जा रहा है तो संबंधित को बिल के पार्ट ए और पार्ट बी के तहत वाहन की जानकारी देना जरूरी था, लेकिन अब इसमें राहत देते हुए दायरे को बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया है। यानी अब यदि किसी दुकान, गोदाम से माल निकला है और इसकी कीमत 50 हजार से ज्यादा है तो ई-वे बिल तो लगेगा, लेकिन इसमें केवल पार्ट ए भरना होगा। पार्ट बी के तहत माल परिवहन करने वाले वाहन की जानकारी जरूरी नहीं रहेगी।

एक सवाल के जवाब में उपायुक्त आर पी वर्मा ने बताया करयोग्य 50,000 रुपये से अधिक माल ले जाने के लिये ई-वे बिल लेना होगा व जीएसटी निरीक्षक के मांगने पर ई-वे बिल दिखाना होगा अन्यथा पैनल्टी लागू होगी।

ऑटो ट्रांसपोर्ट के ई-वे बिल बनने पर अनुपम शर्मा ने बताया कि जिस समय व्हीकल नम्बर बिल में लिखा जाएगा उस दिन रात 12 बजे से ई-वेबिल की अवधि प्रारंभ होगी। हाउस हॉल गुड्स को ईवेबिल से मुक्त कर दिया गया है।

हेल्प डेस्क प्रभारी उमंग नंदवाना ने बताया कि ई-वे बिल को 24 घंटे में रद्द किया जा सकता है एवं 72 घंटों या इसके समकक्ष जो पहले हो उसमे रिजेक्ट किया जा सकता है। एक संशोधन के अनुसार, अब माल को एक ट्रांसपोर्ट से दूसरे को भेजने में नये ट्रांसपोर्ट की आईडी अपडेट करने का अवसर दिया गया है। एक राज्य से दूसरे में माल भेजने पर क्रेता द्वारा अन्य पार्टी को माल हस्तांतरण नये पार्टी के नाम से होगा।

इस मौके पर कम्पनीज एसोसिएशन के सचिव चन्द्रशेखर रामचंदानी, महामंत्री निगम शर्मा, विशाल हरियाणा ट्रांसपोर्ट से संजय शर्मा, एमपी राजस्थान रोड़ लाईन के आंनदी छाबड़ा, ऑटो ट्रांसपोर्ट से महेन्द्र मनसाखा, माहेश्वरी कैरियर से महावीर बाहेती, राधेश्याम पारीक जयपुर औकारा ट्रांसपोर्ट सहित दर्जनों ट्रांसपोटर्स ने अपनी शंकाओं का समाधान किया।

ये नियम अब सरल हुए

-यदि ट्रांसपोर्टर रजिस्टर्ड व्यक्ति से ऑथराइजेशन लेता है तो वह ई-वे बिल का पार्ट-ए जनरेट कर पाएगा।
ई-कॉमर्स कंपनी या कोरियर एजेंसी ऑथराइजेशन देती हैं तो ट्रासंपोर्टर पार्ट-ए जनरेट कर पाएंगे।
-केवल कर योग्य वस्तु की कीमत को देखकर ही ई-वे बिल लगेगा।
-यदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट अर्थात बस इत्यादि में भी 50 हजार रुपए से अधिक का माल परिवहन कर रहा है तो उसे ई-वे बिल जनरेट करना होगा।
-ई-वे बिल का पार्ट-ए जनरेट करने के 15 दिन के भीतर उसका पार्ट-बी जनरेट किया जा सकेगा।
-ई-वे बिल की समय सीमा अगले दिन रात को 12 बजे तक की गई है। पहले सुबह 10 बजे जनरेट होता था तो अगले दिन सुबह 10 बजे तक समय रहता था।

सरकार को फायदा
ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक बिल) माल ढुलाई पर लागू होगा। इसकी वैधता दूरी के हिसाब से तय होगी। ई-वे बिल में माल पर लगने वाले जीएसटी की पूरी जानकारी होगी। ई-वे बिल से पता लगेगा कि सामान का जीएसटी चुकाया है या नहीं। ई-वे बिल से टैक्स वसूली में भारी गिरावट रुकेगी और टैक्स चोरी के मामलों पर लगाम लगेगी। ई-वे बिल के जरिये एक राज्य से दूसरे राज्य में माल ढुलाई में दिक्कतें कम होंगी।

क्या है ई-वे बिल
ई-वे बिल की व्यवस्था के तहत अगर किसी वस्तु का एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर राज्य के भीतर मूवमेंट होता है तो सप्लायर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। नई व्यवस्था में कर योग्य 50,000 रुपये से अधिक मूल्य सामान लाने और ले जाने के लिए ई-वे बिल की जरूरत होगी। किसी एक राज्य के भीतर 50 किलोमीटर के दायरे में आपूर्तिकर्ता से ट्रांसपोर्ट को माल भेजने पर जीएसटी पोर्टल पर उसका ब्यौरा डालने की जरूरत नहीं होगी।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आवश्यक
-प्रत्येक व्यवहारी को ई-वे बिल जारी करना अनिवार्य होगा। इसमें एनरोलमेंट सुविधा प्रदान कर व्यवहारी/ट्रांसपोर्ट ई-वे बिल जारी कर सकेगा।
-जीएटी में पंजीकृत व्यवहारी अपने जीएसटी नम्बर से पोर्टल पर पंजीकृत होगा,वहीं अपंजीकृत ट्रांसपोर्ट पैन एवं आधार कार्ड के माध्यम रिजिस्ट्रड हो सकते है जो पूरे भारत में मान्य होगा।
– पंजीकरण की प्रक्रिया मात्र एक बार ही करना होगा इसके उपरान्त प्राप्त आई.डी. से उपयोगकर्ता समस्त व्यवहार कर सकता है।
– इस आई.डी. पर उपयोगकर्ता को सब-आईडी बनने की सुविधा भी उपलब्ध होगी जिसे यूजर मेनैजमेंट द्वारा कन्ट्रोल किया जा सकेगा। सब-यूजर को सभी अधिकार होंगे जो मेन यूजर के होते है जब तक मैन यूजर अधिकारों मे कोई कटौती ना करे जैसे बिल कैनसील,बिल रिजेक्ट इत्यादी।
– इस सुविधा का प्रयोग एनरोईड फोन अथवा एसएमएस से भी किया जा सकता है जिसे वेबसाईड पर पूर्व निर्धारित करना होगा।
– इसमें एक समरी शीट का आपशन भी दिया गया है जो दिन भर के ट्रांजेक्शनों का रिकॉर्ड व्यवहारी को उपलब्ध करवायेगा एवं कलेक्टेड ई-वे बिल के माध्यम से एक अधिक बिल एवं सामान का एक ई-वे बिल भी जनरेट किया जा सकता है।

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