Tuesday, 23 April, 2024

कोटा के डॉ. सोनी ने पोर्टेबल डिजिटल माइक्रोस्कोप की खोज की

नवाचार : 10 वर्षों में विकसित यह डिवाइस मेडिकल साइंस, एग्रीकल्चर, वेटेनरी आदि में उपयोगी होगी
न्यूजवेव कोटा

कोटा के अनुभवी चिकित्सक डॉ. संजय सोनी ने ऐसी मेडिकल डिवाइस की खोज की है जिससे विभिन्न शहरों व कस्बों में सडकों पर घूम रही निशक्त गायों को दुधारू बनाने में सहयोग करेगी। जिससे किसानों को दुग्धपालन व्यवसाय से आय के नये साधन विकसित होंगे। उन्होंने 10 वर्ष के अनुसंधान एवं परीक्षण के बाद 25 हजार रूपये के इस सस्ते उपकरण को लांच किया है।

Dr sanjay Soni with new device

डॉ. सोनी ने बताया कि लम्बे समय से वे इस डिवाइस पर रिसर्च कर रहे थे। इसके जरिये आवारा घूम रही गायों का सस्ती चिकित्सीय जांच के जरिये शीघ्र उपचार कर उन्हें दुधारू बनाया जा सकेगा। उन्होंने इस डिवाइस के पेटेंट के लिये आवेदन किया है। इस नई डिवाइस को नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) से मान्यता मिल चुकी है।
उन्होंने बताया कि इस डिवाइस के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले रोगियों, पशुधन की रक्त, थूक, यूरीन, पेप स्मीयर और मल इत्यादि की जांच हो सकेगी, जिससे रोग का पता लगाने में मदद मिलेगी तथा समय पर उपचार मिल सकेगा।

बीमारी का पता लगाना आसान

एलन मेडिइनोवेशन्स प्रा. लिमिटेड के निदेशक डॉ.सोनी ने बताया कि उन्होंने उच्च तकनीक वाली अल्ट्रा मॉडर्न रेजोल्यूशन वाले पोर्टेबल डिजिटल माइक्रोस्कोप का आविष्कार कर आईटी से मेडिकल साइंस में नवाचार किया है। यह डिवाइस चिकित्सा, अनुसंधान, कृषि व शिक्षा के क्षेत्र में वरदान साबित होगी। इससे सामान्य माइक्रोस्कोप की अपेक्षा किसी भी वस्तु का परीक्षण गहराई व स्पष्टता के साथ किया जा सकता है। साथ ही परीक्षण के समय उनके डिजिटल चित्र भी लेता है जिससे बीमारी का पता करने में आसानी हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल माइक्रोस्कोप के जरिए रक्त की पेरिफेरियल ब्लड स्मीयर (पीबीएफ), हिस्टोपैथोलोजी, सेल काउंट, फलोरोसेन्ट, माइक्रोस्कोपी, कॉन्ट्रास्ट माइक्रोस्कोपी आदि जांच की जा सकती है। इमेज को दूरस्थ बैठै पैथोलॉजिस्ट देख सकेंगे। इस उपकरण को कोई भी ऑपरेट कर सकता हैं जहां बिजली की सुविधा नहीं है वहां इसे यूएसबी अथवा सेलफोन के माध्यम से चलाया जा सकता है।
कोटा से पायलट प्रोजेक्ट शुरू
उन्होंने कहा कि भारत में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, इसलिये पशुपालक उसका पालन उचित तरीके से करके स्थायी आय का साधन बना सकते हैं। उन्होंने कोटा शहर में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसके तहत अगले 6 माह में शहर को आवारा घूम रही गायों को उपचार के जरिये दुधारू बनाया जायेगा। हाल ही में कोटा में चल रही 80 से अधिक गौशालाओं के संचालकों ने इस उपकरण को खरीदने पर अपनी सहमति दे दी है।

(Visited 529 times, 1 visits today)

Check Also

सीएम भजनलाल शर्मा ने कोटा जिले में निर्माणाधीन नवनेरा बैराज का निरीक्षण किया

ईआरसीपी के प्रथम चरण में निर्माणाधीन बांध का 85 प्रतिशत कार्य हुआ, जून,24 तक पूरा …

error: Content is protected !!