Friday, 19 June, 2026

जम्मू की ‘पल्ली’ बनेगी देश की पहली ‘कार्बन तटस्थ’ ग्राम पंचायत

पल्ली पंचायत के सम्पूर्ण  340 घरों को  मिलेगी सौर ऊर्जा की सौगात

उमाशंकर मिश्र
न्यूजवेव @ नई दिल्ली
जम्म-कश्मीर में सांबा जिले की पल्ली पंचायत को भारत की पहली ‘कार्बन तटस्थ’ ग्राम पंचायत बनने जा रही है। इस पंचायत के 340 घरों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू यात्रा के दौरान सौर ऊर्जा की सौगात मिलेगी।

Palli Village

पल्ली में 500 किलोवाट क्षमता का सौर उर्जा संयंत्र लगेगा, जिससे सम्पूर्ण पंचायत के गांव कार्बन रहित बिजली से रोशन होंगे। इसे भारत सरकार के ‘ग्राम ऊर्जा स्वराज’ के तहत पहली कार्बन तटस्थ पंचायत का दर्जा दिया जायेगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसकी अधिकृत जानकारी दी है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के तहत सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CIL) द्वारा 20 दिनों के रिकॉर्ड समय में पल्ली में ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर (GMSP) संयंत्र लगाया जा रहा है।
प्रदर्शनी में किसानों के लिये पाँच दिनों के मौसम पूर्वानुमान में मददगार ऐप, ‘बैंगनी क्रांति’ के रूप में प्रसिद्ध लैवेंडर खेती, किसानों की आय वृद्धि के लिए सेब उत्पादन बढ़ाने हेतु जैव प्रौद्योगिकी नवाचार, कीटनाशक छिड़काव तथा अपशिष्ट उपचार के लिए ड्रोन उपयोग, और परमाणु विकिरण के माध्यम से फलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने जैसी तकनीक को शामिल किया जायेगा। इसमें 25 से 30 स्टाल्स लगाये जायेंगे।


नई दिल्ली में हुई एक शीर्ष बैठक में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीबी एवं उन्नत आजीविका वाले, स्वस्थ गांव, बाल-सुलभ, पर्याप्त पानी वाले, स्वच्छ और हरे-भरे, बुनियादी रूप से आत्मनिर्भर गांव प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण होंगे। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि डीबीटी की बायो-टेक किसान योजना से लेकर खेती में ड्रोन उपयोग के साथ-साथ केंद्र सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेश सरकार के किसानों के कल्याण से संबंधित अभिनव नवाचारों को प्रदर्शनी में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अरोमा मिशन और ‘बैंगनी क्रांति‘, फ्लोरीकल्चर मिशन, बाँस के आधुनिक उपयोग, अपशिष्ट जल प्रबंधन को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल भी लगाए जाएंगे। (इंडिया साइंस वायर)

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