Monday, 15 August, 2022

राज्य के 11 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 267 असिस्टेंट प्रोफेसर घर बैठेंगे

  • गिर सकता है प्रदेश के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों का स्तर
  • शिक्षकों की कमी दूर करने के लिये कोई कार्ययोजना नहीं

न्यूजवेव @ कोटा

प्रदेश के 11 सरकारी व स्ववित्त पोषित इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढाने वाले 267 फैकल्टी का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होने जा रहा है। लेकिन राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग ने फैकल्टी की इस कमी को दूर करने के लिये कोई कारगर कदम नहीं उठाया है। इन इंजीनियरिंग कॉलेजों में 20 हजार से अधिक बीटेक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
वर्तमान में विभिन्न जिलों के 11 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में मापदंडों के अनुसार, 1300 फैकल्टी नियुक्त होना चाहिये। उसकी तुलना में 526 शिक्षक स्थायी हैं तथा 267 असिस्टेंट प्रोफेसर एमएचआरडी की टेक्यूप-3 योजना के तहत संविदा पर नियुक्त हैं। ये सभी शिक्षक गेट क्वालिफाइड हैं। यदि इनकी सेवाओं को जारी नहीं रखा गया तो गेस्ट फैकल्टी द्वारा टीचिंग करवाई जायेगी जिससे राज्य में बीटेक डिग्री का स्तर ओर गिरेगा।


केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढाने के लिये 2017 में टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (TEQIP) प्रारंभ किया था, जिसके तहत एनआईटी से बीटेक व एमटेक योग्यताधारी शिक्षकों को संविदा पर नियुक्ति देकर विभिन्न आईआईटी से टीचिंग ट्रेनिंग दिलवाई गई थी। MHRD तथा नेशनल प्रोजेक्ट इम्पलीमेंटेशन यूनिट (NPIU) के बीच हुये एमओयू के अनुसार, राज्य सरकार ऐसे संविदा फैकल्टी को परफॉर्मेंस के आधार पर निरंतर रख सकती हैं। जिसके लिये टेक्यूप से वेतनराशि दी जाती है। इस प्रोजेक्ट के तहत सेवायें दे रहे असिस्टेट प्रोफेसर को 70 हजार रू. मासिक वेतन दिया जा रहा है।
बीटेक डिग्री की साख दांव पर
विशेषज्ञों ने बताया कि उच्च तकनीकी शिक्षा में छात्र शिक्षक का अनुपात 1ः20 है, जबकि वर्तमान में 50 स्टूडेंट पर भी एक शिक्षक नियुक्त नहीं है। दूसरी ओर, प्रदेश में उच्च शिक्षित बेरोजगार डिग्रीधारी उपलब्ध हैं। राजस्थान की उच्च तकनीकी शिक्षा में शिक्षकों की लगातार कमी होने से गुणवत्ता में निरंतर गिरावट आ रही है। यही कारण है कि बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियां प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैम्पस भर्ती के लिये नहीं आ रही है। जिससे प्रतिवर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है।
20 हजार स्टूडेंट होंगे प्रभावित
फैकल्टी की कमी से यूसीई, आरटीयू, कोटा, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, झालावाड, इजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर, वुमन इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर, यूसीईटी, बीटीयू, बीकानेर, एमबीएम जोधपुर, सीटीएई, उदयपुर, इंजीनियरिंग कॉलेज, बांसवाडा, भीलवाडा व भरतपुर में संविदा पर अध्यापन कर रहे 267 असिस्टेंट प्रोफेसर घर बैठ जायेंगे। जिससे इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पढाई ठप होने का अंदेशा बना रहेगा।
सरकारी कॉलेजों की ग्रेडिंग प्रभावित होगी
गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रवेश सैनी ने कहा कि सरकारी कॉलेजों की ग्रेडिंग बढाने के लिये टेक्यू के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किये गये थे, उनकी सेवायंें खत्म होने पर कॉलेजों की ग्रेडिंग भी प्रभावित होगी। छात्रहित में उच्च शिक्षित फैकल्टी को नियमित किया जाना चाहिये।
एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर संगीता चाहर ने कहा कि सभी संविदा फैकल्टी एनआईटी से बीटेक या एमटेक हैं, हमने आईआईटी में टीचर्स टेªनिंग भी ली है। जबकि कॉलेज से बीटेक करते ही कोई भी ग्रेजुएट गेस्ट फैकल्टी बन सकता है।

गेस्ट फैकल्टी का विकल्प देंगे
टेक्यूप स्कीम के तहत राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किये गये थे, इनका कार्यकाल इस माह पूरा हो रहा है, हम शिक्षा मंत्रालय के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। राज्य में आर्थिक कारणों से इनको बतौर गेस्ट फैकल्टी सेवायें जारी रखने का अवसर दिया जायेगा। गेस्ट पफैकल्टी का वेतन 18 से 25 हजार रू प्रतिमाह है, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर को 70 हजार रू वेतन पर नियुक्ति मिली है।
– अनिल अग्रवाल, संयुक्त सचिव, उच्च तकनीकी शिक्षा विभाग, राजस्थान

(Visited 877 times, 1 visits today)

Check Also

प्रतिभावान युवाओं को सिविल सेवा परीक्षा की नि:शुल्क तैयारी का मौका

चयन के लिए 31 जुलाई रविवार को कोटा के तीन केंद्रों पर पहले चरण की …

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: