Monday, 18 October, 2021

हर राज्य में तेजी से बढ़ रहा है हृदय रोग

दिनेश सी. शर्मा
न्यूजवेव नईदिल्ली
देश में 25 वर्षों में हृदय रोग, पक्षाघात, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं। प्रतिष्ठित जर्नल द लेंसेट व इससे सम्बद्ध जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययनों से यह बात सामने आई है।
हर राज्य में हृदय तथा रक्त वाहिकाओं संबंधी बीमारियों, मधुमेह, सांस संबंधी बीमारियों, कैंसर और आत्महत्या के 1990 से 2016 तक आंकलन दर्शाते हैं कि ये बीमारियां सभी राज्यों में बढ़ी हैं।
हर राज्य में हृदय संबंधी बीमारियां और पक्षाघात के मामले 50 प्रतिशत से अधिक बढ़े हैं। देश में हुईं कुल मौतों और बीमारियों में इनका योगदान 1990 से दोगुना हो गया है।
ताजा स्टडी के आंकडों को देखें तो भारत में हुईं कुल मौतों में से हृदय संबंधी बीमारियों और पक्षाघात के कारण हुईं मृत्यु के आंकड़े 1990 में 15.2 प्रतिशत की तुलना में 2016 में 28.1 प्रतिशत आंके गए हैं। कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदयरोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण हुईं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय रोग के कारण मृत्यु और अक्षमता का अनुपात काफी अधिक है। भारत में कार्डियो वेस्कुलर बीमारियों से 1990 में 13 लाख से बढ़कर 2016 में 28 लाख मौतें पाई गई।


कार्डियो वेस्कुलर बीमारियों के मामलों की संख्या 1990 में 2.57 करोड़ से बढ़कर 2016 में 5.45 करोड़ हो गई। केरल, पंजाब और तमिलनाडु में इनका प्रसार सबसे अधिक रहा, इसके बाद आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, और पश्चिम बंगाल में भी हार्ट रोगी अधिक पाए गए है।
एक अन्य आंकडे़ के अनुसार, वर्ष 2016 में भारत में कार्डियो वैस्कुलर बीमारियों से हुई कुल मौतों में से आधे से ज्यादा लोग 70 वर्ष से कम उम्र के थे। शोधकर्ताओंके अनुसार ‘‘यह अनुपात कम विकसित राज्यों में सबसे अधिक था।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. क.े श्रीनाथ रेड्डी ने बताया कि प्रत्येक राज्य में सही प्रबंधन हो। किसी विशेष बीमारी का पता लगाते हुए उसे प्राथमिकता दी जाए। इस शोध में डॉ सौम्या स्वामीनाथन और डॉ ललित दंडोना भी शामिल हैं।
आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो.बलराम भार्गव ने कहा कि खून की कमी संबंधी हृदय रोग और मधुमेह में वृद्धि की उच्चतम दर कम विकसित राज्यों में है। ये राज्य पहले से ही पुरानी प्रतिरोधी फेफड़ों की बीमारी और संक्रामक और बच्चों संबंधी बीमारियों से बुरी तरह जूझ रहे है।
कैंसर भी दोगुना हुआ
भारत में कैंसर 1990 से 2016 तक दोगुना हो गया है, लेकिन अलग अलग राज्यों में विभिन्न प्रकार के कैंसरों में व्यापक रूप से भिन्नता देखने को मिली हैं। 2016 में भारत में कुल मृत्यु का 8.3ः कैंसर के कारण था, जो 1990 में हुए कैंसर के योगदान से दोगुना है। भारत में कैंसर रोगियों की संख्या 1990 में 5.48 लाख से बढ़कर 2016 में 10.6 लाख हो गई। 2016 में पाए गए प्रमुख कैंसरों में पेट (9 प्रतिशत), स्तन (8.2 प्रतिशत), फेफड़े (7.5 प्रतिशत), होंठ और मुंह का कैंसर (7.2 प्रतिशत), गले के कैंसर के अलावा नेसोफैरेनिक्स कैंसर (6.8 प्रतिशत), आंत और गुदा के कैंसर (5.8 प्रतिशत), ल्यूकेमिया (5.2 प्रतिशत), और गर्भाशय (5.2 प्रतिशत) कैंसर शामिल हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर), पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई), और इंस्ट्टिट्यूट फॉर हैल्थ मैट्रिक्स एण्ड इवेल्युएशन (आईएचएमई) की भारतीय राज्य स्तरीय रोग संबंधी पहल नामक संयुक्त परियोजना में ये अध्ययन किए गए हैं। शोध में 100 से अधिक भारतीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। (इंडिया साइंस वायर)

भाषांतरण: शुभ्रता मिश्रा

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