Thursday, 30 May, 2024

कोटा कोचिंग से निकल रहे देश के चैम्पियंस

गेट-वे आॅफ सक्सेस: शैक्षणिक सत्र 2018-19 में देशभर के विद्यार्थियों की फस्र्ट च्वाइस बनकर उभरा -कोटा। नए सत्र में 25 प्रतिशत ग्रोथ की संभावना।
इकोनाॅमिक व्यू-
1.40 लाख कोचिंग स्टूडेंट
3500 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री
1000 करोड़ की वार्षिक ट्यूशन फीस
2000 गल्र्स व ब्वायज हाॅस्टल
75,000 पीजी रूम
16 प्रतिशत आबादी को कोचिंग से रोजगार
3000 से अधिक कोचिंग फैकल्टी
750 आईआईटी व एनआईटी फैकल्टी
250 एमबीबीएस फैकल्टी

एकेडेमिक व्यू-
5 यूनिवर्सिटी, 10 इंजीनियरिंग व 1 मेडिकल काॅलेज
10 काॅर्पोरेट कोचिंग इंस्टीट्यूट
40 अन्य कोचिंग इंस्टीट्यूट
50 प्रतिशत कब्जा जेईई-एडवांस्ड की टाॅप-100 रैंक में
23 आईआईटी की 10.988 सीटों में 30 फीसदी पर कोटा कोचिंग स्टूडेंट
7वीं सीट पर कोटा कोचिंग स्टूडेंट आईआईटी में
45 हजार गल्र्स जेईई व मेडिकल कोचिंग के लिए
61 सीटें नीट-2017 की टाॅप-100 रैंक में
8 बार जेईई-एडवांस्ड टाॅपर कोटा कोचिंग से।
नीट व एम्स मेरिट सूची में प्रतिवर्ष कीर्तिमान।

अरविंद गुप्ता
कोटा। चंबल किनारे बसे एजुकेशन हब कोटा में एनएच-76 पर नवनिर्मित हैंगिग ब्रिज ‘गेट-वे आॅफ सक्सेस’ की राह दिखाता है। 12 लाख की आबादी में 2 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने लक्ष्य पर निशाना साधते हुए इसे तक्षशिला जैसा दिया। विदेशों में केपिटल आॅफ कोचिंग के नाम से पहचान रखने वाले इस शहर में पढ़कर निकले 800 से अधिक कोचिंग स्टूडेंट गूगल, फेसबुक, माइक्रोसाॅफ्ट आदि प्रमुख कंपनियों तक पहुंचे, कुछ एमआईटी, स्टेनफोर्ड, हार्वर्ड या प्रीमियर फाॅरेन यूनिवर्सिटी से यूजी व पीजी कोर्सेस में रिसर्च कर रहे हैं। एम्स प्रवेश परीक्षा में प्रतिवर्ष कोटा कोचिंग से सर्वाधिक स्टूडेंट चयनित होते हैं। जेईई-मेन तथा जेईई-एडवांस्ड की आॅल इंडिया मेरिट के टाॅप-10 से टाॅप-1000 रैंक में कोटा कोचिंग स्टूडेंट का वर्चस्व कमोबेश बरकरार है।
आईआईटी, एनआईटी, एम्स या मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए यहां नेशनल लेवल का काॅम्पिटिशन होने से प्रतिवर्ष सफलता का ग्राफ उंचा हुआ। 100 मीटर रेस की तर्ज पर यहां के कोचिंग विद्यार्थी जेईई-मेन, जेईई-एडवांस्ड, एम्स, नीट आदि प्रवेश परीक्षाओं की आॅल इंडिया मेरिट सूची में टाॅप-100 रैंक के लिए मैराथन करते दिखाई देते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी में अव्वल रहने की जिद ऐसी कि मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलाॅजी में 2 लाख से अधिक सवाल हल करते हूए वे कभी थकते नहीं। शहर के शांत शैक्षणिक वातावरण से यहां आकर उनके पढ़ाई के घंटे दोगुना हो जाते हैं, फिर वे एक अच्छे कोच की तरह कोचिंग शिक्षक उन्हें क्लास में आॅलराउंडर बनने के मंत्र देते हैं। वर्षपर्यंत कोचिंग स्टूडेंट 20 से 25 माइनर व मेजर टेस्ट देते हुए मुख्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए खुद को तैयार कर कर लेते हैं। क्रिकेट मैच से पहले बल्लेबाज, गेंदबाज या फील्डर नेट प्रेक्टिस करते हुए खुद की कमियां दूर कर लेते हैं, उसी तरह कोचिंग स्टूडेंट क्लास में रेगुलर डेली प्राॅब्लम प्रेक्टिस (डीपीपी) और नियमित टेस्ट पेपर देकर अपनी कमजोरियां दूर करते हैं। कोच मेंटर के रूप में उनके डाउट दूर करते हैं। नतीजा यह कि मुख्य परीक्षा आने पर वे काॅन्फिडेंस के साथ टाइम मैनेजमेंट, स्पीड व एक्यूरेसी से पेपर साॅल्व करते हैं। एक या दो साल तक दिन-रात कड़ी मेहनत करते हुए उनका थिंकिंग प्रोसेस बहुत तेज हो जाता है। यही उनकी जीत का पैमाना बन जाता है।
आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेषक प्रो.एसजी ढांडे के अनुसार, हर साल सबसे अधिक सलेक्षन कोटा कोचिंग से होते हैं। कोटा अपनी सक्सेस को हर साल रिपीट कर रहा है। यहां बच्चों की पर्सनल अटेंषन पर जोर दिया जाता है। क्लासरूम के बाद डाउट काउंटर्स सुविधा है। क्वालिटी स्टडी मैटेरियल और टेस्ट सीरीज से बच्चों को बहुत मदद मिलती है। आईआईटी से बीटेक और एमबीबीएस फैकल्टी होने से उनके लिए पेपर पैटर्न का आंकलन करना आसान होता है। इसलिए यहां बेस्ट टीचिंग मैथड्स हैं।
परीक्षाएं अनेक लेकिन कोचिंग एक
बात इंजीनियरिंग की हो या मेडिकल की, क्लासरूम कोचिंग में एडमिशन लेकर क्लास-8 से ही स्कूली छात्र अपने टारगेट पर फोकस हो जाता है। वही केवल थ्योरी नाॅलेज पर सीमित न रहकर प्रेक्टिकल लर्निंग को अपनाता है। जेईई-मेन, एडवांस्ड या नीट से पहले वह एनटीएसई, इंटरनेशनल फिजिक्स, केंमिस्ट्री, मैथ्स, बायोलाॅजी, एस्ट्रोनोमी ओलिम्पियाड, जूनियर साइंस ओलिम्पियाड, किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना देकर अपने टेलेंट को परख लेता है। 9वीं एवं 10वीं कक्षाओं में साइंस के विषयों की नींव मजबूत हो जाने से क्लास-11वीं में उसे विषय चुनने में मदद मिलती है। फाउंडेशन मजबूत हो जाने से वे 12वीं बोर्ड परीक्षा के साथ प्रवेश परीक्षाओं की दोहरी तैयारी करते हुए सफल होते हैं।
साल में 10 हजार सवाल हल करने की प्रेक्टिस
एजुकेशन हब में आने वाले कोचिंग विद्यार्थी जेईई या नीट के सिलेबस के अनुसार तैयारी करने के लिए रोज 6 घंटे क्लासरूम में बिताते हैं। इसके बाद वे अपने कमरों में होमवर्क पूरा करते हुए नियामित 3 से 4 घंटे प्रेक्टिस करते हैं। ऐसा करते हुए एक स्टूडेंट वर्षपर्यंत 10 हजार से अधिक सवाल हल करता है। माह में एक बार वे 3 घंटे में माइनर टेस्ट या नेशनल लेवल पर खुद का स्तर परखने के लिए मेजर टेस्ट देते हैं। जिससे उन्हें कमियां दूर करने का मौका मिल जाता है।
प्रवेश परीक्षाओं में आमतौर पर 3 घंटे के आॅब्जेक्टिव पेपर में 180 प्रश्न सही हल करने होते हैं, पेपर पैटर्न में नेगेटिव मार्किंग होती है ताकि स्टूडेंट की निर्णय क्षमता का भी आंकलन हो सके। सिलेबस से बाहर भी कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं। कुल मिलाकर स्टूडेंट की क्षमता को 360 डिग्री पर परखा जाता है। इसलिए वह एप्लीकेशन बेस्ड पढ़ाई के बाद हर सब्जेक्ट में कंसेप्चुअल तैयारी भी करता है। कोटा कोंिचंग सिस्टम में निरंतर मेहनत से स्टूडेंट आॅल राउंडर बनकर निकलते हैं। वे किसी भी एग्जाम को क्रेक करने में सक्षम हो जाते हैं।
इंटरनेशनल लेवल पर देश की ब्रांडिंग
कोटा के कोचिंग स्टूडेंट नितिन गुप्ता जेईई-2000 में आॅल इंडिया टाॅपर रहे। इन दिनों आईआईटी, कानपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर नितिन बताते हैं कि 14 वर्ष की उम्र से वे कोटा आ गए थे। बाद में आईआईटी से बीटेक कर उन्होने यूनिवर्सिटी आॅफ केलिफोर्निया से बायोलाॅजी में पीएचडी की। जालौर की एक ढाणी से कोटा आए डूंगराराम चैधरी ने जेईई-2002 में आॅल इंडिया टाॅपर बनकर आईआईटी,कानपुर से बीटेक किया। वर्तमान में वे सेनफ्रांन्सिस्को में ओरेकल कंपनी में प्रिंसिपल मेंबर आॅफ टेक्निकल स्टाफ हैं। जेईई-2007 में आॅल इंडिया टाॅपर पंजाब के अचिन कोटा की पढ़ाई को नहीं भूलते। आईआईटी, बाॅम्बे से बीटेक कर वे मोरगन स्टेनले कंपनी, न्यूयार्क में ट्रेजरी स्टेªटेजिस्ट बने। जेईई-2008 के टाॅपर शिथिकांत ने कई ओलिम्पियाड में गोल्ड मेडल जीते। आईआईटी, कानपुर से बीटेक कर यूनिवर्सिटी आॅफ वाटरलू, कनाडा से पीएचडी में भी टाॅप किया। इन दिनों वे कनाडा में साइंटिस्ट हैं। कोटा कोचिंग से निकले झांसी के अर्पित अग्रवाल जेईई-2012 में आॅल इंडिया टाॅपर रहे। आईआईटी, दिल्ली से बीटेक कर वे इन दिनों यूएसए में साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं। जेईई-2014 में टाॅपर रहे उदयपुर के चित्रांग मुर्डिया आईआईटी की बजाय मसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) से स्काॅलरषिप लेकर बीटेक कर रहे हैं। मप्र के सतना से कोटा में कोचिंग लेकर जेईई एडवांस्ड-2015 में टाॅपर बने सतवत जगवानी आईआईटी से बीटेक करते हुए डिजिटल इंडिया के ब्रांड एम्बेसेडर बने। जेईई एडवांस्ड-2016 में टाॅपर जयपुर के अमन बंसल आईआईटी, बाॅम्बे से बीटेक कर रहे हैं, उनका कहना है कि कोचिंग से नए साइंटिफिक मैथड या कंसेप्ट जानना किसी एडवेंचर से कम नहीं रहा। भारतीय टेलेंट की परफाॅर्मेंस को देखते हुए जेईई-मेन तथा जेईई-एडवांस्ड परीक्षाओं के सेंटर अब 10 अन्य देषों में भी खोल दिए गए।
फ्रेशर्स एवं रिपीटर्स में कड़ा मुकाबला
जिस तरह खेल के मैदान पर टीम के नए-पुराने खिलाड़ी एक साथ खेलते हैं। अनुभव और क्षमता अलग-अलग लेकिन मुकाबला एक। ठीक वैसे ही प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में फ्रेेशर्स और रिपीटर्स के बीच कांटे का मुकाबला रहता है। विभिन्न परीक्षाओं में 2 से 5 अवसर मिलने के कारण विद्यार्थी ब्रांड इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना चाहते हैं, इसलिए वे 2 से 4 वर्ष तक कोचिंग लेते हैं। खास बात यह कि पहली बार कोचिंग ले रहे फ्रेशर्स स्टूडेंट दिमागी प्रतिस्पर्धा में कहीं पीछे नहीं रहते। निरंतर जीत का मोटिवेशन उन्हें एक कदम आगे बढ़ा देता है। कोटा शहर में विभिन्न राज्यों के 17 से 22 वर्ष की उम्र में क्लासरूम कोचिंग ले रहे विद्यार्थी कॅरिअर की सबसे कठिन मैराथन में रोज दिखाई देती हैं। संस्कृति, भाषा, खानपान और तापमान सब कुछ अलग-अलग लेकिन सपने सच करने की जिद एक समान होती है। सभी राज्यों की संस्कृति का संगम होने से इसे मिनी इंडिया के रूप में देखा जाता है।

नया सत्र-नई उम्मीदें
सफलता के शिखर को छूते हुए एजुकेशन हब कोटा में नए साल से नए सत्र का आगाज हो रहा है। जनवरी से शिक्षा नगरी कोटा में शैक्षणिक हलचलें तेज हो गईं।छ प्रमुख संस्थानों में नए शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए आधारभूत ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए कैंपस बनाए जा रहेे हैं। विभिन्न राज्यों में 10वीं परीक्षा देकर साइंस में रूचि रखने वाले हजारों विद्यार्थी अगले 2-3 माह में अभिभावकों के साथ कोटा पहंुचेंगे। शहर अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकांे और नागरिकों के बीच विश्वास की डोर से विकास की उड़ान भर रहा है। प्रमुख कोचिंग संस्थानों में नए सत्र के लिए स्टडी मैटेरियल और आवेदन फाॅर्म सहित क्लासरूम की तैयारियां की जा रही हैं। आवासीय काॅलोनियों में हाॅस्टल, मैस या पीजी रूम को संवारा जा रहा है।
बाहर से आने वाले अभिभावक किसी अच्छे कोचिंग संस्थान में बच्चों को दाखिला दिलाने के लिए इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कोचिंग ले रहे हजारों स्टूडेंट अच्छे रिजल्ट के लिए दिन-रात रिवीजन करने में जुटे हैं। खास बात यह कि एजुकेशन हब में हर विद्यार्थी के चेहरे पर जीत का विश्वास दिखाई देता है।
पूर्वोŸार राज्यों की पहली पसंद
मेघालय के तुरा शहर में दूरदर्शन में कार्यरत जाॅन केनेडी मोमन अपने बेटे सेंगिक्कम बी.संगमा के साथ कोटा में एजुकेशन का माहौल देख चकित रह गए। 3 दिन तक दिल्ली, बिहार, उप्र और उडीसा के बच्चों से यहां की पढ़ाई के बारे में पड़ताल की। बेटे बी.संगमा आईआईटी-जेईई कोचिंग के लिए एडमिशन दिलाया। 6 हजार किमी दूर मेघालय से दिल्ली तक फ्लाइट ली, वहां से ट्रेन से कोटा पहंुचे। अरूणाचल के पासीघाट से एनीस कमसी व किन्तो तामुत और नौगांव असम से दीपांकर शर्मा गोवाहाटी से फ्लाइट से जयपुर होते हुए कोटा आए। तमिलनाडु के तंजाउर से केटी कानन बेटी कार्तिका कोे एडमिशन दिलाने पहंुचे तो पूर्वोŸार राज्यों के बच्चों से मिलकर खुश हुए।
शिक्षा में कश्मीर से अच्छा कोटा
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पारिगाम गांव में शिक्षक नजीर अहमद भट ने बेटे आमीर नजीर और मो.मकबूल मीर ने बेटे मीर कामरान को अच्छी एजुकेशन के लिए कोटा को चुना। वे मानते हैं कि कश्मीर में अशांति होने से बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही। देश में कोटा ऐसा शहर है, जहां हर कदम पर शिक्षा का माहौल है। आमीर ने बताया कि एम्स में जाना है, इसलिए घर से दूर आकर पूरी मेहनत करूंगा। अनन्तनाग के महविश, मीर तायफा, तबस्सुम और श्रीनगर की सायमा को यहां रहते हुए घर की याद नहीं आती। जम्मू-कश्मीर से 500 से अधिक बच्चे कोटा के शांत वातावरण मंे कोचिंग ले रहे हैं।
बिहार-यूपी के बच्चों में आगे बढ़ने की जिद
बिहार के छपरा से जेईई की कोचिंग के लिए आए जतिन प्रसाद और श्रीधर सर्राफ ने बताया कि यह शांत शहर है, जहां हर तरफ केवल पढ़ाई का माहौल दिखता है। इंटरनेट पर देखा कि यहां के रिजल्ट देश मंे सबसे उंचे हैं। बेटी वंदना से मिलने पहुंचे चंदन केसरी ने बताया कि पश्चिम चम्पारण क्षेत्र के बच्चे साइंस में आगे की पढ़ाई के लिए केवल कोटा ही आएंगे। पूर्णिया (बिहार) में रेवेन्यू विभाग में सेवारत सुरेंद्र बैठा अपने बेटे स्वर्णिम आनंद की इच्छा पूरी करने के लिए उसे कोचिंग दिलाने के लिए एजुकेशन हब में लाए। वे बच्चों से बात करके यहां की सारी जानकारी ले रहे हैं। अच्छी बात है कि बच्चे यहां परिवार जैसा महसूस करते हैं। पटना के अक्षत, ओमप्रकाश, जमालपुर के यश, रोहित ने बताया कि प्री-मेडिकल में प्रत्येक टाॅपिक को डिटेल से समझा।
अलग-2 भाषा-संस्कृति का मेलजोल
नए सत्र में प्री-मेडिकल में फाजिल्का के अनुराग ने कहा कि मुझे होम टाउन से यहां अच्छा लग रहा है। मुरादाबाद के फैजान, सिवांग के अभिषेक सिंह,गौरव मिश्रा, सासाराम से रविभूषण पटेल, मुंगेर से अमत्र्य शंकर, मिर्जापुर के अभिषेक कुशवाह और मुजफ्फरपुर के अमनदीप सिंह ने कहा कि यहां की टीचिंग हमारे स्कूल से कई गुना अच्छी है। रतलाम के निखिल ने कहा कि हमें घर की याद नहीं आएगी। यहां एकाग्रता मिली। हिमाचल प्रदेश के रोबिट और राजन पायलट और अमृतसर के गुरजिंदर पाल सिंह ने कहा कि यहां पढ़ने वाले अच्छे दोस्त मिले। कोलकाता के रोहित अग्रवाल ने कहा कि एक साल यहां रहते हुए अब मन में जोश है।
कोचिंग संचालकों का कहना है कि नए सत्र में सभी बच्चों की केअरिंग और ओवरआॅल डेवलपमेंट को सिलेबस से जोड़ा है। हर स्तर पर सही देखभाल, हेल्थ चेकअप, अवेयरनेस, मोटिवेशन, योग-प्राणायाम के साथ प्रत्येक विद्यार्थी की समस्याएं फैकल्टी मेंटर के रूप में दूर करंेगे। पूरे सत्र में एकेडेमिक, साइक्लोजिकल एवं कॅरिअर काउंसिलिंग सेल बच्चों की मदद करेगी। टेस्ट माह में एक बार होंगे। हाॅस्टल और मैस संचालक प्रत्येक कोचिंग विद्यार्थी को अपने बच्चे की तरह प्यार देगे। जाहिर है, कोई नए उद्योग नहीं खुलने से शहर की इकोनाॅमी पूरी तरह कोचिंग विद्यार्थियों पर निर्भर है।

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