Tuesday, 18 August, 2026

प्राकट्य दिवस पर मां फलौदी की चरण पूजा से धन्य हुये हजारों श्रद्धालु

बसंत पंचमी महोत्सव – देश में मेड़तवाल वैश्य समाज का खैराबाद में इकलौता मंदिर होने से कई राज्यों से आये श्रद्धालुओं ने बसंत पूजा कर मन्नतें मांगी
न्यूजवेव @कोटा / रामगंजमंडी

मेडतवाल (वैश्य) समाज की तीर्थनगरी खैराबादधाम में शुक्रवार को बसंत पंचमी महोत्सव पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। आराध्यदेवी श्रीफलौदी माताजी महाराज का प्राकट्य दिवस होने से पंचमी पर उनके दिव्य विग्रह को गर्भगृह से बाहर सिंहासन पर विराजित किया गया।
मंदिर श्री फलौदी माताजी महराज प्रन्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेठ मोहनदास करोडिया, राष्ट्रीय महामंत्री पुरूषोत्तम घाटिया, कोषाध्यक्ष कैलाशचंद्र दलाल एवं मंदिर श्री फलौदी महाराज सेवा समिति के महामंत्री विष्णुप्रसाद करोडिया मंडावर ने बताया कि दोपहर 12ः15 बजे महाआरती के बाद देर शाम तक चरण दर्शन व केसर-चंदन से पूजा करने का सिलसिला जारी रहा। समूचा मंदिर परिसर फलौदी माता के जयकारों से गूंजता रहा। मान्यता है कि बसंत पंचमी पर वरद मुद्रा में फलदायिनी मां फलौदी भक्तों को मनवांछित फल देती है।


बसंत पंचमी महोत्सव संयोजक मोहनलाल चौधरी ने बताया कि तीर्थनगरी खैराबाद में प्रातः 8 बजे कलश पूजन के बाद मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। प्रातः 10ः30 बजे फलौदी माताजी का अभिषेक हुआ। इसके बाद मुख्य द्वार के सिंहासन पर विराजित मां फलौदी की स्वर्णकलश, चांदी के चंवर, छड़ी, हार माला के साथ महाआरती एवं कपूर आरती की गई। इस वर्ष बड़ी आरती जगदीश रामविलास गुप्ता, गोघटपुर एवं कपूर आरती जगदीश गुप्ता, झूमकी ने की। स्वर्ण चंवर सेवा निर्मल गुप्ता रामदयाल गुप्ता, रामगंजमंडी एवं बिरधीचंद गुप्ता कोटा ने की। चांदी चंवर सेवा देवकीनंदन बोेबस, चेचट, अर्पित गुप्ता, जीरापुर, महेंद्र गुप्ता, रावतभाटा, ओमप्रकाश मोहित गुप्ता, बकानी ने एवं चंादी छड़ी सेवा अर्वेद गोपालचंद्र गुप्ता, भोपाल एवं राजकुमार मेडतवाल, भोपाल द्वारा की गई। इस आरती में 10 समाजबंधुओं ने माला हार से सेवा की।
अनन्त फल देने वाली श्री फलौदी माताजी
मंदिर परिसर में माताजी की चरण पूजा करने के लिये सैकडों श्रद्धालु लंबी कतारों में खडे़ होकर गुणगान करते रहे .देश में इकलौता अष्टकोणीय देवी मंदिर होने से इसे चमत्कारिक माना जाता है। मां फलौदी में दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी तीनों देवियों की शक्तियां हैं। फलौदी माता के उंचे हस्त में दुर्गा का वास है होने से उनको द्धितीय ब्रह्मचारिणी का रूप माना जाता है। दूसरा हस्त नीचे वरद मुद्रा में हैं, जो लक्ष्मी स्वरूप है। गदा-पदम लक्ष्मी के पास होते हैं, इसलिये अनन्त फल देने वाली फलौदी माताजी को गदा पदमधारी कहते हैं। वर्ष में एक बार इस दिन चरण पूजा का अवसर मिलने से अविवाहित युवक-युवतियों ने मनोकामना की। अन्य समाजों के भक्तों ने भी माताजी के दर्शन किये।

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