न्यूजवेव@बकानी
मालवा के दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमल किशोरजी नागर ने कहा कि आपको मनुष्य जीवन में कुछ बनना है तो भगवान राम की तरह मर्यादित, तपस्वी और सादगीपूर्ण बनकर दिखाना। यदि ऐसा नहीं बन सकते हो तो कुंभकरण बनकर सो जाना लेकिन जीवन में कभी रावण जैसा बनने का प्रयास मत करना।
पूज्य पं.नागर जी ने गुरूवार को बकानी के पास थोबडिया खुर्द गांव में आयोजित विराट श्रीमद भागवत कथा के प्रथम सोपान में कहा कि हमारे जीवन में नित्य कर्म सत कर्म जैसे हों। जिस तरह आम का पेड़ लगाने वाला एक दिन संसार से चला जाता है लेकिन उसके कर्माें का फल दूसरों को पीढ़ियों तक मिलता रहता है।
एक प्रसंग सुनाते हुये उन्होंने कहा कि बुजुर्ग व्यक्ति सांसारिक जीवन में भव सागर को पार करने के लिये प्रभु का निरंतर सुमिरन करें। परमात्मा मानते हैं कि मनुष्य अपने जीवन की वयस्क व्यवस्था में कई पाप कर्म कर लेता है। पाप दूर करने के लिये निष्काम भक्ति मार्ग पर चलना है तो कथा-सत्संग से अवश्य जुड़ना होगा।
हमारी भावनायें पवित्र हों

महिला एवं पुरूष श्रोताओं से खचाखच भरे पांडाल में उन्होने कहा कि अभी ना बनी तो फिर कब बनेगी, अब बिगड़ी तो फिर कब बनेगी जैसे विचार मन में लाकर सद्मार्ग पर चलना सीखें। हमारी भावनायें शुद्ध और पवित्र होनी चाहिए। आटा चक्की के दोनों पाट काम करते है तब अनाज आटा बनकर बाहर निकलता है। इसलिये जो भी अच्छा करना करना है, उसे समय रहते कर लो। रोज सुबह उठकर सूर्य को प्रणाम करें, पृथ्वी को नमन करें। इससे मन निर्मल रहेगा और विनम्रता आयेगी।

प्रथम सोपान की शुरूआत में 11 वर्षीय बाल संत गोविंद ने मधुर वाणी में एक घंटा ओजस्वी प्रवचन देकर हजारों भक्तों का मन मोह लिया। उन्होने कहा कि आप कथा में चाहे मन से बैठे हों या नहीं, भक्ति से तार स्वतः जुडने लगते हैं। जिस तरह रेल में बैठ जाने पर वह आपको मंजिल तक पहुंचाती है, उसी तरह कथा-सत्संग भी आपको मोक्ष तक ले जाती है।
कथा आयोजक गौसेवक मोहनलाल मदनलाल विश्वकर्मा ने बताया कि गुरूवार सुबह भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में महिलायें एवं गौ भक्त शामिल हुये। कथा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी प्रवचन सुनने पहुंची। उन्होने पूज्य पं.नागर जी से आर्शीवाद लिया।
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