Monday, 19 January, 2026

जीवन में धन, संतन व स्तन कभी प्रकट नहीं करें -पूज्य पं.नागरजी

श्रीमद् भागवत कथा : दिव्य गौसेवक संत पं.कमल किशोरजी नागर ने कहा, शरीर के रोम-रोम में राम का नाम बसा लो
न्यूजवेव @ बकानी

दिव्य गौसेवक संत पं.कमल किशोरजी नागर ने बकानी के पास थोबडिया खुर्द में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे सोपान में कहा कि भारतीय संस्कृति में यदि धनवान कभी धन प्रकट न करें, संत कभी अपने तप का संतन प्रकट न करें और नारी कभी स्तन प्रकट न करें तो परमात्मा से स्वतः जुड़ाव होने लगेगा। याद रखें, इस युग में आंखें कम खराब है, नजरें ज्यादा खराब हो गई है।
सोमवार को पांचवे दिन हजारों भक्तों से सराबोर विराट पांडाल में उन्होंने कहा कि यदि अंतर्मन से प्रभु भक्ति करना है तो वह दबाव में न हो, किसी के प्रभाव में न हो और न ही किसी लगाव में हो। हमें अपने स्वभाव में ही भक्ति को उतारना है। यदि आपने अपना स्वभाव बिगाड़ लिया तो कोई आपके पास नहीं बैठेगा। इसलिये हमें भक्ति के स्वभाव में धनी बनना है।
आजकल पाखंड बहुत बढ़ रहा है


पूज्य संत नागरजी ने कहा कि आजकल धार्मिंक आयोजनों में पाखंड अर्थात पाप का खंड बहुत फैल रहा है। याद रखें पाखंड हमेशा बडे़ लोग ही फैलाते हैं। यदि आप पाखंड के साथ रहोगे तो समय कालचक्र बनकर कर चलेगा। यदि भगवान के साथ रहोगे तो आपकी रक्षा के लिये सुदर्शन चक्र चलता रहेगा। अपने जीवन में साढे़ तीन करोड़ राम नाम का जप करना है। इसलिये अपने स्वभाव में, शरीर के रोम रोम में राम का नाम बसा लो।
लंका का रावण और शंका का रावण
उन्होंने कहा कि हमारे भगवान श्री राम ने लंका का रावण तो बहुत पहले मार दिया था लेकिन इस युग में पनप रहा शंका का रावण कौन मारेगा। यह संकल्प करें कि जहां शंका हो मुझे वहां कभी जाना ही नहीं। जहां सत्संग चल रहा हो, मैं वहां रूक सका या नहीं।
काम करने वाले कम, कान भरने वाले ज्यादा
प्रेरक प्रवचन देते हुये पूज्य नागरजी ने कहा कि इस दुनिया में अच्छे काम करने वाले कम हैं लेकिन कान भरने वाले बहुत ज्यादा हैं। इसीलिये परिवारों में आपस मंे कटुता बढ़ रही है। कान भरने वालों ने कई घर बिगाड़ दिये हैं। संसार की तरफ देखने का मन न हो तो अपने पांव की तरफ देखो। दूसरों की तरफ देखते रहोगे तो आपका नुकसान ही होगा। किसी सिद्ध पुरूष की दी हुई गौमुखी माला आपका परमात्मा से जल्दी संबंध बना देती है।

भाग्यशाली वही जिनके घर में मां-बाप हैं
उन्होंने परिवारों में कलह दूर करने के लिये सूत्र दिया कि घर में नारी गूंगी हो जाये अर्थात बुरा कम बोले। पुरूष बहरा हो जाये अर्थात बुरा कम सुने तो उनका घर ब्रह्म भी नहीं बिगाड़ सकते हैं। भाग्यशाली वह नहीं जिनके घर में खूब माल-ताल हो, भाग्यशाली तो वहीं हैं जिनके घर में मां-बाप हैं। इसलिये जीवन में मां-बाप और भगवान से कभी उऋण मत होना।
भागवत कथा की शुरूआत में 11 वर्षीय बाल संत गोविंद ने अपनी मधुर भजन-‘कल्याण मेरे इस जीवन का भगवान कब होगा। अच्छे दिन बीते जाते हैं, गुरूजन बहुविधी समझाते हैं, भोग स्थल से योग स्थल में प्रस्थान न जाने कब होगा..‘ सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में कथा आयोजक मोहनलाल, मदनलाल विश्वकर्मा ने परिवार सहित श्रीमद भागवत आरती की।

(Visited 12 times, 12 visits today)

Check Also

हमारे जीवन में भगवान राम जैसी मर्यादा व सादगी हो- पूज्य पं.नागर जी

न्यूजवेव@बकानी  मालवा के दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं.कमल किशोरजी नागर ने कहा कि आपको मनुष्य …

error: Content is protected !!