श्रीमद भागवत कथा के विराट पांडाल में हजारों भक्तों ने रात्रि में संकीर्तन किया, 21 को समापन
न्यूजवेव@बकानी
मालवा के 11 वर्षीय बाल संत गोविंद नागर ने कहा कि जब हम यह मान लेते हैं कि जीवन में प्रेम, करूणा, लगन, भक्ति सब झूठ है तो वर्तमान में आपका माया से अधिक मोह भी कहां सच्चा है। थोबडिया खुर्द में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन बाल संत ने कहा कि हमारे शरीर से आत्मा का साथ छूटने पर परिजन 15 दिन तक खूब आंसू बहाते हैं। लेकिन एक वर्ष बाद सब यह कहकर भूल जाते हैं कि यह एक नंबर का व्यक्ति था, जो साथ छोडकर चला गया। इसलिये सांसारिक वस्तुओं और अपनों से मोह करने की बजाय कथा और परमात्मा से मोह रखना। यह पुण्य कभी साथ छोड़कर नहीं जायेगा।
सारगर्भित प्रवचन में उन्होंने कहा कि लोग अपने जीवन में मेहनत करके तन और धन से बडे़ बन रहे हैं लेकिन मन से कभी गरीब मत बनना। हमें जीवन में सिर्फ बड़ा नहीं बनना है, अच्छे कर्माें से महान बनना है। लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा विश्व में सबसे बड़ी इसलिये बनी क्योंकि वे कर्म से महान पुरूष थे।
बाल संत ने कहा कि एक नदी पर बडे़ इंजीनियरों ने बांध का निर्माण किया। उस पर रोज सैंकडों वाहन निकलते हैं। लेकिन कुछ सालों बाद उसमें दरारें आने लगती है, पिलर हिलने लगते हैं। वह डेम टूट जाता है लेकिन नदी का पानी कभी नहीं टूटता है। इसलिये परमात्मा की निरंतर भक्ति करते हुये उस पर अटूट भरोसा रखो। संकट आने पर वह अवश्य संभाल लेगा।
‘प्रभू तेरा द्वार न छूटे रे…’
मंगलवार को खचाखच भरे विशाल पांडाल में बाल संत गोविंद ने मार्मिक भजन – ‘प्रभू तेरा द्वार न छूटे रे, छूट जाये संसार मगर तेरा साथ न छूटे रे…’ सुनाया तो हजारों भक्त भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं करें जिससे परमात्मा भी दुख महसूस करे। हेराफेरी, चोरी, चुगली से कुछ नहीं मिलने वाला है। मैं वही करूंगा जोे परमात्मा को अच्छा लगेगा। जीवन के अंत में आपके कमाये हुये गाडी, मकान, साधन में से कुछ नहीं बचेगा। सिर्फ एक ही बचेगा, भगवान श्रीराम का नाम अर्थात पुण्य कार्य। यही पुण्य साथ जायेगा। मन में हमेशा यही प्रार्थना करना कि द्वारिकाधीश मैं आपके द्वार पर खडा हूं। मेरा मोह सिर्फ आपसे है, मुझे यहां से वहां अपने साथ ले चलो।
भक्त का संबंध सिर्फ भगवान से- पं.नागरजी
दिव्य गौसेवक संत पं.कमल किशोरजी नागर ने कहा कि हमारे पास पुण्य प्राप्त करने के लिये कई अवसर आये, हमने उन अवसरों को गवां दिया। भगवान की कथा कितना विराट रूप ले लेती है। जब भक्ति नहीं कर सके तो इस विराट स्वरूप का दर्शन ही कर लो, जिसमें हजारों भक्त बैठे हैं। जब आप बस में बैठते हैं तो सवारी, डॉक्टर के यहां बीमार, व्यपारी के यहां ग्राहक, मंदिर में गये तो दर्शनार्थी कहलाते हैं। इसी तरह जब कथा में बैठते हो तो भगत कहलाते हो, जिनका संबंध सिर्फ भगवान से होता है।
भोग छोड़ पुण्य के बीज बनो
उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान का अनाज कुछ मंडी में ,कुछ भोजन में बीत जाता है। कुछ दाना अगले वर्ष के लिये अच्छे बीज के लिये रखते हैं। इसी तरह मनुष्य जीवन में भी पाप और पुण्य दोनों के बीज हैं। आपने जैसा बोया वैसा ही उगेगा। श्रीकृष्ण ने पूरे बृज को अपना बना लिया था। आपने जीवन के कुछ वर्ष आनंद और भोग में बिता लिये तो प्रार्थना करो कि हे प्रभू, मुझे मनुष्य बनाओ तो बृज का ही बनाना। पशु बनाये तो गाय, पत्थर बनाये तो गोवर्धन पर्वत का, पेड़ बनाये तो वह कदम जिसकी टहनी पर तू बैठा था। इस घोर कलियुग में जन्म मत देना। जब तू अवतार ले तब देना। भारत में बृजवासी और अयोध्यावासी धन्य हैं, जिनका जन्म ऐसी पवित्र भूमि पर हुआ। अंत में कथा आयोजक पूरीलाल, मोहनलाल व मदनलाल विश्वकर्मा परिवार ने हजारों भक्तों के साथ भागवत महाआरती की।
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