Wednesday, 24 July, 2024

कोटा ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार ने 1250 एकड़ भूमि दी, फिर भी मामला केंद्र ने अटकाया

कोटा में चार साल से लम्बित है ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का मामला
कोटा 5 सितम्बर। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय की पालना में एयरपोर्ट ऑथोरिटी को निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का कार्य यूआईटी द्वारा पूरा कर दिया गया है। डायवर्जन की राशि की प्रथम किश्त भी वन विभाग में जमा करा दी गई है। उन्होंने तिथिवार जानकारी देते हुए केन्द्र सरकार के स्तर पर लम्बित मामलों की जानकारी दी।
स्वायत्त शासन मंत्री ने बताया कि केन्द्र सरकार ने एयरपोर्ट ऑथोरिटी के जरिए 2019 में सरकार से कोटा में ग्रीन एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग थी। राज्य सरकार ने सहमति दी जिसके 7 माह बाद अगस्त 2019 को एयरपोर्ट ऑथोरिटी का चार सदस्य दल आया। उन्होंने फिजिबिलिटी देखकर चित्तौड़ जयपुर मार्ग पर वन-वे नगर विकास न्यास के स्वामित्व की 1346 हैक्टेयर जमीन की मांग की। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने उक्त चिन्हित जमीन में से दो ब्लॉक बनाए, ब्लॉक-ए 510 हैक्टयर तथा ब्लॉक-बी 836 हैक्टेयर का था। नगर विकास न्यास ने एयरपोर्ट ऑथोरिटी को पत्र लिखकर आवश्यकता से तीन गुना अधिक जमीन की मांग के बारे में जानकारी चाही।
कोटा में सबसे अधिक भूमि उपलब्ध कराई
उन्होंने बताया कि प्रदेश में जयपुर एयरपोर्ट 300 हैक्टेयर ,उदयपुर 200 हैक्टेयर तथा किशनगढ़ 300 हैक्टेयर में बना हुआ है। राज्य सरकार एवं एयरपोर्ट ऑथोरिटी के मध्य 11 पत्र व्यवहार हुए जिसके बाद एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने ब्लॉक ए 510 हैक्ट जमीन की मांग की छोड़ दी तथा ब्लॉक बी में से भी केवल 500 हैक्ट जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि राज्य मंत्री मंडल ने नवम्बर 2021 को निर्णय लिया कि एयरपोर्ट ऑथोरिटी को 1250 एकड़ निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। जिसके बाद नगर विकास न्यास ने उनके खाते की लगभग 34 हैक्टेयर जमीन एयरपोर्ट ऑथोरिटी के नाम हस्तांतरित कर दी। उन्होंने बताया कि वन विभाग की लगभग 466 हैक्ट भूमि का डायवर्जन के 45 करोड़ रूपये वन विभाग द्वारा मांग की गई जिसमें नगर विकास न्यास द्वारा प्रथम किश्त 21 करोड़ 13 लाख रूपये जमा कराए गए। उन्होंने बताया कि डायवर्जन प्रस्ताव संबंधित कार्यकारी एजेंसी को कराना होता है लेकिन कार्य में देरी नहीं हो इसको देखते हुए न्यास द्वारा कंसल्टेंट नियुक्त किया गया।
परियोजना लागत राशि जमा कराने को लिखा
स्वायत्त शासन मंत्री ने बताया कि इस बीच पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा ग्रिड लाईन बदलने के लिए 54 करोड़ 28 लाख रूपये जमा कराने का पत्र मई 2022 में आया। जिसके जवाब में जिला कलक्टर द्वारा जून 2022 को पत्र लिखकर अवगत कराया कि ग्रिड लाईन बदनले का कार्य परियोजना लागत में आता है, सरकार द्वारा निःशुल्क भूमि उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने बताया कि बाद में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ने 40.14 करोड़ की लागत आंक कर अप्रेल 2023 में राज्य सरकार को पत्र भिजवाया। उन्होंने बताया कि इस बीच वन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 60 करोड़ रूपये डायवर्जन राशि के जमा कराने के लिए पत्र राज्य सरकार को लिखा गया जबकि डायवर्जन की राशि राज्य सरकार के वन विभाग में जमा होती है।
पुराने एयरपोर्ट पर मिनी सचिवालय की योजना
स्वायत्त शासन मंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय में एयरपोर्ट ऑथोरिटी को निःशुल्क भूमि नगर विकास न्यास को उपलब्ध करानी थी, वह काम समय पर पूरा किया गया। दूसरा निर्णय मुख्य सचिव द्वारा एयरपोर्ट ऑथोरिटी को पत्र लिखकर अवगत कराया कि पुराने एयरपोर्ट की जमीन का मालिकाना हक राज्य सरकार के पास होने के कारण यूआईटी को उपलब्ध कराना था। एयरपोर्ट ऑथोरिटी को यह जमीन सरकार ने विमान संचालन के लिए उपलब्ध कराई थी।
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने जवाबी पत्र में दिल्ली में आयोजित बैठक का हवाला देते हुए नगर विकास न्यास को पुराने एयरपोर्ट की जमीन मुद्रांकन (बिक्री) कर एयरपोर्ट ऑथोरिटी को राशि जमा कराने के लिए लिखा गया। एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट की अनुमाति लागत 1200 करोड़ रूपये मानते हुए पुराने एयरपोर्ट की जमीन के मुद्रांकन से प्राप्त राशि से कराए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ने मार्च 2023 को परियोजना लागत की 2 प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान नगर विकास न्यास को करने का पत्र भी लिखा गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक मामला केन्द्र सरकार के पास ही लम्बित है, केन्द्र द्वारा अभी तक मिट्टी जांच व टॉपिकल सर्वे कराया गया। राज्य सरकार पुराने एयरपोर्ट की जमीन को बिक्री नहीं करना चाहती, बल्कि यहां मिनी सचिवालय एवं ग्रीनरी विकसित करना चाहती है।
न्यूजवेव

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