Monday, 15 August, 2022

एमबीएम इंजीनियरिंग काॅलेज,जोधपुर में इस वर्ष ‘नो एडमिशन’ का संकट

एआईसीईटी के आदेश- गवर्नमेंट एमबीएम काॅलेज में 236 के मुकाबले केवल 61 रेगुलर फैकल्टी हैं। 100 लेबोरेट्री में केवल 33 स्टाफ है, निरीक्षण में भारी कमियां उजागर होने से काॅलेज को सत्र 2018-19 में ‘नो एडमिशन केटेगरी’ में माना है।

अरविंद
न्यूजवेव @ कोटा

राज्य में सबसे पुराने व अग्रणी इंजीनियरिंग काॅलेजों में से एक गवर्नमेंट एमबीएम इंजीनियरिंग काॅलेज, जोधपुर में सत्र 2018-19 में विद्यार्थियों को एडमिशन से वंचित होना पड़ सकता है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के निदेशक (एप्रूवल) ने 10 अप्रैल,2018 को काॅलेज की मान्यता रोकते हुए आदेश दिए कि निर्धारित मापदंडों में भारी कमियां पाई जाने के कारण काॅलेज को इस सत्र में ‘नो एडमिशन केटेगरी’ में माना जाए।

     Order of AICTE on 10th April,2018

आदेश के अनुसार, एमबीएम इंजीनियरिंग काॅलेज को वर्ष 1988-99 से 2017-18 तक एआईसीटीई द्वारा एप्रूवल दी जाती रही। लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशानुसार,10 जून,17 को ईवीसी में काॅलेज में कमियों का उल्लेख किया गया, जिसे 5 जुलाई,17 को एआईसीटीई की स्टेंडिंग कमेटी में प्रस्तुत किया गया।

एआईसीटीई ने काॅलेज को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया लेकिन काॅलेज द्वारा 13 में से केवल 2 कमियां दूर की गई। 15 जुलाई को काॅलेज ने जबाव में स्वीकार किया कि रेगुलर फैकल्टी एवं डीन 54 ही हैं, शेष गेस्ट फैकल्टी हैं।

एक ही काॅलेज में 189 फैकल्टी की कमी

राज्य के प्रतिष्ठित गवर्नमेंट एमबीएम इंजीनियरिंग काॅलेज में इस समय 70 प्रतिशत रेगुलर फैकल्टी की कमी है। छात्रों की संख्या की तुलना में यहां नियमानुसार 236 रेगुलर फैकल्टी होने चाहिए, जबकि इस समय केवल 61 फैकल्टी कार्यरत हैं। इस तरह 189 फैकल्टी की कमी होने से एआईसीटीई ने इसे गंभीरता से लिया है। काॅलेज में 99 गेस्ट व संविदा फैकल्टी नियुक्त हैं।

अब काॅलेज की स्टेचुअरी बाॅडी तय करेगी कि काॅलेज को एआईसीटीई के मापदंडों के अनुसार कैसे चलाया जाए। फिलहाल, एआईसीटीई ने आदेश जारी कर एमबीएम काॅलेज को ‘नो एडमिशन केटेगरी’ की श्रेणी में रखा है। जिससे इस सत्र में बीटेक व अन्य कोसेर्स में एडमिशन नहीं दिए जा सकेंगे।

यह राज्य के लिए शर्म की बात

उच्च शिक्षा मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह राज्य के लिए शर्म की बात है। उन्होंने एक कम्प्लायंस बोर्ड गठित कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए। बोर्ड के सदस्य 24 अप्रैल को दिल्ली में एआईसीटीई के सामने काॅलेज व सरकार का पक्ष रखेंगे। राज्य सरकार ने रूसा से मिले 10 करोड़ के अनुदान से 4 करोड़ रू की राशि एमबीएम काॅलेज को देने की घोषणा की।

ये कमियां उजागर हुईं

-एमबीएम काॅलेज में 236 की तुलना में केवल 61 फैकल्टी हैं।
– 100 आधुनिक लैबोरेट्री में केवल 33 तकनीकी स्टाफ है।
– सुरक्षा प्रावधानों एवं बिल्डिंग मेंटीनेंस में कमियां पाई गईं।
– लाइब्रेरी में 203 नेशनल जर्नल की तुलना में केवल 68 जर्नल हैं।
– भू-उपयोग सर्टिफिकेट नियमानुसार सही नहीं है।

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