Friday, 27 February, 2026

वेद रहित विज्ञान से दुनिया दिशाहीन- शंकराचार्य

धर्मसभा : एलन में गोवर्द्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का व्याख्यान

न्यूजवेव @ कोटा

गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कहा कि वैदिक सनातन हिंदू धर्म के आगे कोई भी बम, मिसाइल, शक्ति वैचारिक धरातल पर नहीं टिक सकती। आज दुनिया वेद रहित विज्ञान के कारण दिशाहीन हो रही है। वेद के सिद्धांतों को अंगीकार कर लेते तो आज पृथ्वी, जल, आकाश व हवा में इतनी विकृतियां नहीं आती।

एलन के सद्गुण सभागार में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि कि आनंद का दूसरा नाम ईश्वर है। ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानने का अर्थ है, खुद के अस्तित्व को नहीं मानना। व्याख्यान में बड़ी संख्या में कोचिंग विद्यार्थी मौजूद रहे। एलन कॅरिअर इंस्टीट्यूट के निदेशक गोविंद माहेश्वरी, विधायक प्रहलाद गुंजल ने शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद को नमन करते हुए शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। राधा माधव मंदिर समिति व चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी कोटा की धरती पर शंकराचार्य के आगमन का स्वागत किया।

पढाई में एकाग्रता के लिए नींद जरुरी


स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि साधनहीन प्राणियों को विक्षिप्त होने से बचाने के लिए ईश्वर ने गहरी नींद की रचना की। जब तक हम गहरी नींद में होते हैं, तब तक सर्दी, जुकाम, भूख या प्यास हमारे पास नहीं पहुंच पाती है।ं एकाग्रता सेे पढ़ाई के लिए विद्यार्थी गहरी नींद अवश्य लें। निद्रावस्था में व्यक्ति परमात्मा के सबसे नजदीक रहता है।

सैद्धांतिक धरातल पर हम विदेशों के परतंत्र


शंकराचार्य ने कहा कि आज कहनेे का हम स्वतंत्र हैं लेकिन सैद्धांतिक रूप से स्वतंत्र नहीं। देश में न तो विकास के माध्यम अपने हैं न ही सेवा के प्रकल्प अपने हैं। सैद्धांतिक धरातल पर देखें तो आज भी हम परतंत्र ही है। भौतिक विकास के नाम पर सनातन परंपरा नष्ट हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि डॉक्टर बनने के बाद खुद को देश के कल्याण में समर्पित करना। तभी जीवन में शिक्षा का महत्व है। केवल धनार्जन के लिए शिक्षा या डिग्री लेना अर्थहीन है। आज यही देखने में आ रहा है। हम भारतीय जीवन मूल्यों को पीछे छोड़कर आगे बढने की होड कर रहे हैं।

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