Tuesday, 1 December, 2020

‘रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म’ पर फोकस है नया श्रम कानून

  • श्रमेव जयते के मंत्र पर संसद ने पारित किया नया श्रम कानून
  • देश के 50 करोड़ से अधिक कामगारों को मिलेगा लाभ
  • श्रमजीवी पत्रकारों में डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी शामिल

न्यूजवेव @ नईदिल्ली

नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश के कामगारों के वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा के लिये ‘रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म’ मंत्र देते हुये नया श्रम कानून लागू किया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में शामिल किया गया है। देश में प्रचलित कुल 44 श्रम कानूनों में से 12 कानून पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वेतन संबंधी संहिता के माध्यम से 50 करोड़ श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी तथा समय पर वेतन मिलने का कानूनी अ‎धिकार दिया था। इसी क्रम में अब 3 अन्य श्रम संहिताएं लाई जा रही हैं।
मोदी सरकार का प्रयास रहा कि प्रत्येक औद्योगिक संस्थान में, चाहे वहां एक ही श्रमिक कार्य कर रहा हो, एक प्रभावी एवं समयबद्ध विवाद निस्तारण प्रणाली हो। सामाजिक सुरक्षा संहिता, संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का कार्य किया गया है। इसमें भवन निर्माण कामगारों के लिए ईपीएफओ, ईएसआईसी, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा फंड से संबंधित उपबंध शामिल हैं।
अब तेजी से बढेगी न्यूनतम मजदूरी


‘श्रमेव जयते’ के सिद्धांत पर श्रमिकों को वेतन सुरक्षा, काम करने के वातावरण की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा त्वरित विवाद निस्तारण प्रणाली दी जा रही है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और छोटे व्यापारियों को पेंशन देना, महिलाओं के मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना, ईपीएफ तथा ईएसआईसी का दायरा बढ़ाना, विभिन्न कल्याणकारी सुविधाओं की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करने का प्रयास करना, न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाने जैसे कार्य अब तेजी से होंगे।
अब तक 44 श्रम कानून होने पर भी देश के 50 करोड़ श्रमिकों में से 30 प्रतिशत को ही न्यूनतम मजदूरी का कानूनी अधिकार था तथा सभी श्रमिकों को समय पर वेतन भी नहीं दिया जाता था। इस विसंगति को पहली बार मोदी सरकार ने दूर किया है।
वार्षिक मेडिकल चेकअप होगा
श्रम मंत्री ने कहा कि ‘श्रमिक सुरक्षा’ दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है। श्रमिक को काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण देने से उसके स्वास्थ्य की सुरक्षा हो और वह एक खुशहाल जीवन जी सके। इसके लिए ओएसएच संहिता में पहली बार, एक निश्चित आयु से ऊपर के श्रमिकों के लिए, वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है। सुरक्षा से संबंधित मानदंडों को प्रभावी रखने के लिए उन्हें नेशनल ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हैल्थ बोर्ड द्वारा नई तकनीक के साथ बदला जा जायेगा। यह बोर्ड एक त्रिपक्षीय संस्था होगी, जिसमें केन्द्र एवं राज्य सरकार, श्रमिक संगठन, नियोक्ता संगठन के प्रतिनिधि होंगे। वर्तमान श्रम कानून में कैंटीन, क्रैच, फर्स्ट एड, तथा अन्य कल्याणकारी सुविधाओं के लिए एक समान प्रावधान किए गए हैं।
हर श्रमिक को मिलेगा नियुक्ति पत्र


अब तक श्रमिकों की यह समस्या रही कि वे यह सिद्ध नहीं कर पाते हैं कि वे किस संस्थान के श्रमिक हैं। इसके लिए नियुक्ति पत्र का कानूनी अधिकार, हर श्रमिक को इस कोड के माध्यम से दिया गया है। वर्तमान में किसी श्रमिक को एक वर्ष में न्यूनतम 240 दिन का काम करने के बाद ही, हर 20 दिन पर एक दिन की छुट्टी पाने का अधिकार मिलता था। अब ओएसएच संहिता में हमने, छुट्टी की पात्रता के लिए, 240 दिन की न्यूनतम शर्तों को घटाकर 180 दिन कर दिया है। कार्य स्थल पर चोट लगने या मृत्यु होने पर नियोक्ता के ऊपर लगाए गए जुर्माने का कम से कम 50 प्रतिशत, अन्य लाभों के अतिरिक्त पीड़ित श्रमिक को देने का प्रावधान कानून में पहली बार किया गया है।
ESIC का दायरा बढ़ाया
सामाजिक सुरक्षा संहिता में ESCI और EPFO के दायरे को बढ़ाया जा रहा है। ईएसआईसी के दायरे को बढ़ाने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि अब इसकी कवरेज देश के सभी 740 जिलों में होगी। इसके अतिरिक्त ईएसआईसी का विकल्प, बागान श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग तथा प्लेटफॉर्म वर्कर्स तथा 10 श्रमिकों से कम श्रमिक वाले संस्थानों के लिए भी होगा।
यदि किसी संस्थान में जोखिम वाला कार्य होता है, तो उस संस्थान को एक श्रमिक होने पर भी अनिवार्य रुप से ESIC के दायरे में लाया जाएगा। इसी प्रकार EPFO के दायरे को बढ़ाने के लिए वर्तमान कानून में संस्थानों के शिड्यूल को हटा दिया गया है और अब वे सभी संस्थान जिनमें 20 या उससे अधिक श्रमिक हैं, वे ईपीएफ के दायरे में आएंगे। इसके अतिरिक्त 20 से कम श्रमिकों वाले संस्थान तथा स्व-रोजगार वाले श्रमिकों के लिए भी ईपीएफओ का विकल्प, सामाजिक सुरक्षा संहिता में दिया जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा कोष से मदद
श्रम मंत्री ने आगे कहा कि 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रावधान किया गया है। इस फंड के द्वारा असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिक और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं बनायी जायेंगी। इससे, इन 40 करोड़ श्रमिक भाई-बहनों को सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सभी प्रकार के लाभ जैसे- मृत्यु बीमा, दुर्घटना बीमा, मातृत्व लाभ और पेंशन इत्यादि प्रदान करने के लिए योजनाएं बनायी जायेंगी।
कामगार की परिभाषा में शामिल, सुपरवाइजर की वेतन सीमा को 10 हजार रुपए से बढ़ाकर अब 18 हजार रुपए कर दिया गया है। इस बदलाव से आज के मुकाबले कहीं ज्यादा सुपरवाइजर, आईआर संहिता की परिधि में आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य श्रेणी के श्रमिकों के लिए कोई वेतन सीमा नहीं है।
निश्चित अवधि (फिक्स्ड टर्म) वाले रोजगार को आईआर संहिता में लाने पर कहा कि निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तें, वेतन, छुट्टी एवं सामाजिक सुरक्षा भी, एक नियमित कर्मचारी के समान ही होंगी। इसके अतिरिक्त निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों को प्रो राटा ग्रेच्युटी का अधिकार भी दिया गया है।
हड़ताल से 14 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक
किसी भी श्रमिक का स्ट्राईक पर जाने का अधिकार सरकार ने वापिस नहीं लिया है। हड़ताल पर जाने से पहले, 14 दिन के नोटिस पीरियड की बाध्यता हर संस्थान पर इसलिए लागू की गयी है, जिससे इस अवधि में आपसी बातचीत के माध्यम से विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया जा सके। श्रमिकों के हड़ताल पर जाने से, न तो श्रमिकों का, और ना ही इंडस्ट्री का कोई लाभ होता है। आईआर संहिता में छंटनी, क्लोजर या जबरन छंटनी में थ्रेसहोल्ड को 100 श्रमिक से बढ़ाकर 300 श्रमिक करने की बात है, इस पर श्रम मंत्री ने कहा कि श्रम एक समवर्ती सूची का विषय है और संबंधित राज्य सरकारों को भी अपनी परिस्थितियों के अनुरूप श्रम कानूनों में परिवर्तन करने का अधिकार है। 16 राज्य, पहले ही अपने यहां यह सीमा बढ़ा चुके हैं। संसदीय स्थायी समिति ने भी यह अनुशंसा की थी कि इस सीमा को बढ़ा कर 300 कर दिया जाय।
गंगवार ने कहा कि कानून में पहली बार ट्रेड यूनियंस को संस्थान स्तर, राज्य स्तर तथा केन्द्र स्तर पर मान्यता दी जा रही है। किसी भी श्रमिक की यदि नौकरी छूट जाती है तो दोबारा उसके रोजगार की संभावना बढ़ाने के उद्देश्य से आईआर संहिता में पहली बार पुनः कौशल (रि स्किलिंग) फंड का प्रावधान किया गया है। इन श्रमिकों को इसके लिए 15 दिन का वेतन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल होगा। जिससे सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास सुनिश्चित होगा।

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