Monday, 15 August, 2022

भारत में डॉक्टर्स से जुडी अंतरंग सच्चाई

1 जुलाई 2022 को डॉक्टर्स डे पर विशेष
न्यूजवेव @ कोटा

Dr Bidhan Chandra Roy

1 जुलाई को भारत रत्न डॉ.बिधान चंद्र रॉय के जन्मदिवस पर भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डॉ. राय को 4 फरवरी 1961 को भारत रत्न से नवाजा था। डॉक्टर्स डे पर ‘आंत्रप्रन्योशिप फॉर डॉक्टर्सः हाउ टू बिल्ड योवर ऑन सक्सेफुल मेडिकल प्रेक्टिस’ पुस्तक के लेखक वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने मेडिकल प्रोफेशन की अंतरंग सच्चाई को उजागर किया है।

Dr Suresh K Pandey
  • आईएमए द्वारा भारत में 10000 चिकित्सकों पर एक दशक में किए अध्ययन से पता चला कि भारत में चिकित्सकों की औसत आयु मात्र 59 वर्ष है। यह आम नागरिकों की औसत आयु (67) से लगभग 8 वर्ष कम है। इसका प्रमुख कारण हृदय रोग, कैंसर, इंफेक्शन एवं आत्महत्या आदि है।
  •  ब्रिटिश जर्नरल ऑफ जनरल प्रेक्टिस के अनुसार चिकित्सकों की आत्महत्या (सुसाईड) अन्य किसी भी प्रोफेशन में सबसे अधिक है। चिकित्सकों में काम के बढ़ते दबाव एवं वर्क लाईफ बेलेन्स के अभाव में डिप्रेशन आदि बढ़ने के कारण सुसाइड की प्रवृति तेजी से बढ़ी है।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन अमेरिका में किए गए अध्ययन के अनुसार 40 प्रतिशत महिला चिकित्सक चिकित्सकीय ट्रेनिंग के 6 वर्ष के अंदर पार्ट टाईम कार्य करने लगती है अथवा मेडिकल प्रोफेशन पूरी तरह से छोड़ देती है। वे पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए ऐसा करती है। मेडस्केप लाईफ स्टाईल सर्वे द्वारा पता चला कि इमरजेंसी मेडिसिन, ऑबस्टेट्रिक्स गायक्नोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, ट्रोमा आदि कार्य करने वाले चिकित्सक में सर्वाधिक तनावग्रस्त रहते है।
  • अमेरिका के मेयो क्लिनिक शोध के अनुसार व्यस्त चिकित्सक औसतन 11 सैकण्ड का समय ही रोगी को सुनने में देते है।

रोगी की दवा केपिटेल लेटर्स में लिखी जाये

  •  नेशनल मेडिकल जर्नरल ऑफ इण्डिया के अनुसार चिकित्सका कीें अस्पष्ट लिखावट के कारण हर वर्ष 7 हजार रोगियों का उपचार प्रभावित होता है। चिकित्सकों को रोगी की दवा केपीटल लेटर अथवा साफ साफ लिखावट के साथ लिखना जरूरी है।
  • डॉक्टर अपने प्रोफेशन के प्रति जुनूनी होते है। हेल्कोबेक्टर पॉईलॉरी नामक कीटाणु की खोज करने के लिए बेरी मार्शल चिकित्सक ने इस कीटाणु का कल्चर पी लिया जिससे उनको पेट में अल्सर पैदा हुआ एवं इस अल्सर का सफलता पूर्वक उपचार एन्टी बॉयोटिक से किया। उनकी इस खोज के लिए उन्हे 2005 में नोबल प्राईज से नवाजा गया।

इसलिये बढ़ गये मेडिकल टेस्ट

  • कंज्यूमर केस एवम् मारपीट, वॉयलेंस के बढ़ते खतरे के कारण आज डॉक्टर्स डिफेंसिव मेडिसिन अपनाने पर मजबूर हैं। जिससे सिरदर्द आदि के लिये भी चिकित्सक अब कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी जैसे टेस्ट करवा रहें हैं।
  •  भारत मेडिकल टूरिज्म में थाईलेंड, सिंगापुर के बाद तीसरा पंसदीदा डेस्टीनेशन बन चुका है।
  •  भारत में हर वर्ष 12,55,786 एलोपैथिक डॉक्टर एमबीबीएस करने के बाद नेशनल मेडिकल कमिशन से पंजीकृत होते है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों को विश्व का चिकित्सक एवं नर्सेज सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है।

चिकित्सक एवम् रोगी के बीच कैसे बढ़े विश्वास


वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. विदुषी शर्मा ने बताया कि भारत में चिकित्सकों और मरीजों के बीच विश्वास का रिश्ता काफी कमजोर होता जा रहा है। रोगियों की बढ़ती अपेक्षाओं, उपचार, ऑपरेशन में सफलता नहीं मिल पाने या जीवन न बचा पाने पर रोगी के परिजन हिंसा पर उतर आते हैं। जिससे छोटे अस्पताल गंभीर रोगियों का उपचार नहीं कर उन्हें महानगरों के बड़े अस्पतालों में रैफर कर रहे हैं।
देश में सरकारें व आम जनता हैल्थ, हाइजीन, हॉस्पिटल को प्राथमिकता देकर जागरूकता बढ़ाये। सरकार हैल्थ केयर पर जी डी पी का 1.5 प्रतिशत से बढाकर 5 प्रतिशत तक खर्च करें। सरकारी अस्पतालों का इंफ्रा स्ट्रक्चर एवं मेनपॉवर सुदृढ़ बनाते हुए चिकित्सको को सरकारी नौकरियों में अच्छी सैलेरी दी जाये। चिकित्सकों को भी केयर (देखभाल), कंपैशन (दयालुता), कम्युनिकेशन (संवादशीलता), कोमपेटेंस (दक्षता) पर ध्यान देना होगा एवं रोगियों का विश्वास जीतने के लिए हर संभव प्रयास करने होगें।

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