Tuesday, 3 August, 2021

पित्त नली में फंसी पथरी लेप्रोस्कोपी से निकाली, महिला रोगी को लौटाई मुस्कान

जयपुर में एंडोस्कोपी सर्जरी से महिला रोगी की पथरी नहीं निकाली जा सकी, उसे कोटा में जिंदल लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल ने संभव कर दिखाया
न्यूजवेव @ कोटा
मध्यप्रदेश की एक महिला पित्त नली में एक सेमी मोटी पथरी जमा हो जाने से पिछले एक माह से जानलेवा दर्द से कराहती रही थी। गाल ब्लेडर में संक्रमण हो जाने के कारण उनकी पीड़ा दोगुना हो गई। 20 दिन पहले उनके गुर्दे में भी तकलीफ बढने लगी। पचोर निवासी लक्ष्मी गुप्ता (57) के परिजनों ने उन्हें कोटा में एंडोस्कोपिक सर्जन को दिखाया, जिन्होंने ऑपरेशन किया लेकिन पथरी निकालने में विफल रहे। उसके बाद जयपुर में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर पित्त नली में फंसी पथरी को निकलवाने के लिये एंडोस्कोपी सर्जरी करवाई लेकिन कई प्रयास करने पर भी चिकित्सक सफल नहीं हो सके। जिससे उनकी स्थिति जोखिमपूर्ण हो गई।
उन्होंने परिचितों की सलाह पर जवाहर नगर स्थित जिंदल हॉस्पिटल के निदेशक वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.दिनेश जिंदल को दिखाया। उन्होने जांच में बताया कि पित्त नलिका (CBD) दोनो ओर से सिकुड गई है, बीच में पथरी फंसी हुई है। इसे वे दर्दरहित लेप्रोस्कोपी सर्जरी से निकालने का प्रयास करेंगे। बुधवार को उन्होंने महिला रोगी का जटिल ऑपेशन कर मात्र 65 मिनट में गाल ब्लेडर व पित्त की नली से 1 सेमी मोटी पथरी को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। महज 8 घंटे बाद मरीज को तरल पेय पदार्थ देकर आंतों की स्थिति को सामान्य कर दिया, जिससे रोगी के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। जटिल ऑपरेशन में एनेस्थिया चिकित्सक डॉ. अंकुर जैन ने भी सहयोग किया। परिजनों ने इस जोखिमपूर्ण सर्जरी के लिये डॉ.दिनेश जिंदल का आभार जताया।
कोटा में अत्याधुनिक सर्जरी से मिल रही राहत
जिदंल हॉस्पिटल के वरिष्ठ लेप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. दिनेश जिंदल ने बताया कि इन दिनों कई गंभीर रोगी पडौसी राज्यों से कोटा आ रहे हैं। नवीनतम तकनीक से सर्जरी कर उन्हें तत्काल राहत पहुंचाई जा रही है। कोरोना महामारी के दौरान वे गाल ब्लेडर पथरी, सीबीडी, पिस्टूला, पाइल्स, हर्निया आदि से पीड़ित 25 से अधिक गंभीर रोगियों की दुर्लभ सर्जरी कर चुके हैं।
डॉ. जिंदल ने बताया कि भोजन करते समय आंतो में स्त्राव होता है, जिससे पित्त थैली सिकुड जाती है। लीवर में जो पित्त बनता है, वह गाल ब्लेडर में जाकर संचित हो जाता है। इस दौरान पथरी जमा हो जाने पर कई माह तक उसका पता नहीं चल पाता है, जिससे पथरी के असहनीय दर्द से पीडित रोगी को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से तत्काल राहत मिल जाती है।

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