Monday, 22 April, 2024

एक आंख से दृष्टिहीन सायबीन को मिला ईद का तोहफा

मधु स्मृति संस्थान के अथक प्रयासों से जयपुर में उसे एक कृत्रिम आंख प्रत्यारोपित हुई
न्यूजवेव कोटा
एक आंख से दृष्टिहीन निराश्रित युवती सायबीन को ईद के त्यौहार पर खुशी को तोहफा मिला। मधु स्मृति संस्थान द्वारा रविवार को जयपुर में पिंक सिटी रेटिना सेंटर में दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सक ने उसकी कॉस्मेटिर सर्जरी कर कृत्रिम आंख प्रत्यारोपित की, जिससे 22 वर्ष पश्चात् उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।

संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक ने बताया कि 3 वर्ष की उम्र से सायबीन लावारिस बच्ची के रूप में संस्थान में आई थी। उसके माता-पिता नहीं है, इसलिये बेटी मानकर उसकी परवरिश की। संस्थान में निराश्रित बच्चों के साथ रहकर उसने बचपन से पढाई में रूचि ली और इस समय वह जेडीबी गर्ल्स कॉलेज में बीए फाइनल की छात्रा है। उसकी बांयी आंख जन्म से बंद थी, जिससे बडी होने पर उसमें हीनभावना रहती थी।
सुवि नेत्र चिकित्सालय ने दिया निःशुल्क परामर्श
उन्होंने कोटा में सुवि नेत्र चिकित्सालय में नेत्र सर्जन डॉ सुरेश कुमार पांडेय व डॉ विदूषी पांडेय को दिखाया। जहां रेटिना विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कोठारी ने जांच कर बताया कि सायबीन का रेटिना जन्म से खराब है, इसलिये उसे इस आंख से रोशनी नहीं मिल सकती है लेकिन कृत्रिम आंख प्रत्यारोपित करने से उसका चेहरे की खूबसूरती लौट आएगी। उसकी दूसरी आंख सामान्य है। करीब तीन वर्ष तक डॉ. विदूषी पांडेय उसे निःशुल्क परामर्श व दवाइयां देती रही।

संस्थान के संरक्षक हरगोविंद निर्भीक ने बताया कि रविवार को जयपुर में तीन घंटे तक हुई सर्जरी में दिल्ली से आये रेटिना विशेषज्ञ ने उसकी कृत्रिम आंख प्रत्यारोपित कर दी। उसके इलाज पर लगभग 30 हजार रूपये का खर्च संस्थान द्वारा दिया गया। सोमवार को ईद होने से उसे बस से कोटा लेकर आ गये। मधु स्मृति संस्थान में आने पर 150 से अधिक निराश्रित बच्चों ने सायबीन के साथ खुशियां मनाई।

प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करेगी

संगीत में रूचि रखने वाली प्रतिभाशाली सायबीन गायिका भी है। संस्थान में सभी बच्चों के लिये खाना बनाने में भी वह सहयोग करती है। एक आंख बंद होने से कॉलेज में उसे कई बार झिझक महसूस होती थी लेकिन अब कृत्रिम आंख लग जाने से उसे देखने में सुविधा हो गई है। वह बीए फाइनल के बाद प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करेगी।

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