Saturday, 23 January, 2021

कोरोना उपचार के लिए Favipiravir टेबलेट लॉन्च करेगी सिप्ला

CSIR द्वारा विकसित है एंटी-वायरल दवा ‘फेविपिरवीर’(Favipiravir Tablet) 

उमाशंकर मिश्र
न्यूजवेव @ नई दिल्ली
जापान की कंपनी फ्यूजी द्वारा खोजी एवं CSIR द्वारा विकसित एंटी-वायरल दवा ‘फेविपिरवीर’ (Favipiravir) के बड़े पैमाने पर लागत-प्रभावी उत्पादन के लिए इसकी तकनीक दवा कंपनी सिप्ला को सौंपी गयी है। कोविड-19 उपचार के लिए फेविपिरवीर टेबलेट को लॉन्च करने के लिए सिप्ला ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने आधिकारिक बयान में कहा कि जल्द ही यह दवा लॉन्च कर दी जायेगी। सूत्रों के अनुसार, भारत में इसकी अनुमानित लागत 75 रू प्रति टेबलेट हो सकती है।


कोविड-19 के उपचार के लिए नई दवाओं की खोज के साथ-साथ शोधकर्ता दूसरी बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं का चिकित्सीय परीक्षण भी इसके मरीजों पर कर रहे हैं। ऐसी ही एक दवा फेविपिरवीर को कोविड-19 के खिलाफ किए गए चिकित्सीय परीक्षणों में प्रभावी पाया गया है। Favipiravir को कोविड-19 से हल्के एवं मध्यम रूप से बीमार रोगियों के उपचार में विशेष रूप से असरकारी पाया गया। जापान की कंपनी फ्यूजी द्वारा खोजी गई यह दवा पेटेंट प्रतिबंधों से मुक्त है।
CSIR की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (IICT) के शोधकर्ताओं ने फेविपिरवीर के उत्पादन की लागत-प्रभावी प्रक्रिया विकसित की है। व्यापक स्तर पर उत्पादन के लिए सिप्ला को यह तकनीक सौंपे जाने से पहले IICT के शोधकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रसायनों के उपयोग से इस दवा के सक्रिय औषध घटकों (API) का संश्लेषण किया है। सिप्ला ने अपनी निर्माण इकाई में इस प्रक्रिया को विस्तारित किया है और भारत में उत्पाद लॉन्च करने की अनुमति के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से संपर्क किया है।


IICT के निदेशक डॉ एस. चंद्रशेखर ने कहा है कि “CSIR-IICT द्वारा पेश की गई यह तकनीक बेहद प्रभावी है, जिससे इसकी लागत में कमी आई है। इस तकनीक की मदद से सिप्ला बेहद कम समय में बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकती है।” CSIR के महानिदेशक डॉ शेखर सी. मांडे ने कहा है कि “कोविड-19 से लड़ने के लिए CSIR त्वरित समाधान एवं उत्पाद विकसित कर रहा है और सिप्ला के साथ यह साझेदारी दर्शाती है कि CSIR किस तरह दूसरी बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाओं का नये सिरे से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।”(इंडिया साइंस वायर)

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