Monday, 27 June, 2022

यूक्रेन से लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स पर छाये संकट के बादल

अभिभावकों ने स्टूडेंट्स की एमबीबीएस डिग्री भारत में पूरी करवाने के लिये केंद्र व राज्य सरकार से लगाई गुहार
न्यूजवेव @ कोटा 

रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुये ताजा हालातों से यूक्रेन में एमबीबीएस कर रहे हजारों भारतीय स्टूडेंट्स के कॅरिअर पर संकट के बादल छाने लगे हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय विद्यार्थियों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिये त्वरित कार्ययोजना बनाकर उस पर उच्चस्तरीय अमल भी किया, जिससे अधिकांश विद्यार्थी अपने घरों पर लौट चुके हैं। लेकिन अब एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि उनकी डिग्री की शेष पढाई कैसे और कहां से पूरी होगी।
शिक्षा नगरी में यूक्रेन से लौटे 20 से अधिक मेडिकल विद्यार्थियों के परेशान अभिभावकों ने गणेश उद्यान में आपात बैठक कर एक अभिभावक समिति का गठन किया। समिति के अध्यक्ष दिवाकर जोशी, उपाध्यक्ष धमेंद्र टांक,महामंत्री राजेंद्र गोठानिया, संयोजक विष्णु प्रसाद शर्मा एवं संगठन मंत्री अखिलेश शर्मा नियुक्ति किये गये। समिति ने यूक्रेन में फंसे भारतीय मेडिकल विद्यार्थियों को उनके घरों तक सुरक्षित वापसी करवाने के लिये केंद्र एवं राज्य सरकार का आभार जताया।
बैठक में अभिभावकों ने यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों से कम फीस पर एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों की डिग्री अधूरी रह जाने पर विशेष चिंता जताते हुये केंद्र एवं राज्य सरकार से आग्रह किया कि भारतीय बच्चों को शेष पढाई भारत में पूरी करवाने के लिये विशेष व्यवस्था करवाने का प्रयास करे, जिससे वे भारत में रहकर अपनी सेवायें दे सकें। बैठक में मृतक भारतीय छात्र नवीन को श्रद्धाजंलि दी गई।
अभिभावक समिति के अध्यक्ष दिवाकर जोशी ने बताया कि आगामी 20 मार्च को दोपहर 2 बजे छत्र विलास उद्यान, नयापुरा में हाडौती के सभी प्रभावित बच्चों एवं उनके अभिभावकों को एक महत्वपूर्ण बैठक रखी गई है, जिसमें बच्चों के कॅरिअर पर आये संकट एवं उनकी आगे की पढाई पर विचार-विमर्श किया जायेगा।
भारतीय विद्यार्थियों की पीड़ा


कोटा की मेडिकल छात्रा धृति जोशी ने बताया कि उसे नीट क्वालिफाई करने के बावजूद सामान्य वर्ग होने से देश के मेडिकल कॉलेजों में सीट नहीं मिल सकी। यहां के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने के लिये एक करोड़ रूपये से अधिक फीस की आवश्यकता थी, जिससे पापा पूरी नहीं कर सके। ऐसे में उसने कम फीस पर यूक्रेन के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने का निर्णय लिया। लेकिन युद्ध के हालात से उनका भविष्य अब संकट में है। वह एमबीबीएस सेकड ईयर की स्टूडेंट है और अपनी डिग्री भारत में रहकर पूरी करना चाहती है।
स्वदेश लौटे कोटा की रिशिका गोठानिया, स्वप्निल शर्मा, हर्षित आहूजा एमबीबीएस द्वितीय वर्ष, विशाल गुप्ता, आशीष नागर, अजय कुमार, यदुेंवेंद्र मालव, जय टाक, मुक्तिका वर्मा, इशिका गौतम चौथे वर्ष, नितिन चौधरी बीएसएमयू यूनिवर्सिटी, यूक्रेन में पांचवे वर्ष में अध्ययनरत हैं। उन्होंने बताया कि देश में नीट क्वालिफाई करने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के कारण कम अंक वालों को सीटें मिल जाती है और वे नीट में अधिक अंक प्राप्त करके भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस वसूली पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होने से मनमानी फीस ली जा रही है, जिससे प्रतिभावान विद्यार्थियों को अच्छी पढाई के लिये पलायन करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार को इस बारे में ठोस कदम उठाकर निजी मेडिकल कॉलेजों की लूट पर रोक लगानी होगी।

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